भारत का वस्त्र उद्योग तेजी से नवाचार और टिकाऊपन की दिशा में अग्रसर हो रहा है। वर्ष 2030 तक भारत ने वस्त्र एवं परिधान उद्योग का आकार 350 अरब डॉलर और निर्यात का लक्ष्य 100 अरब डॉलर निर्धारित किया है। यह लक्ष्य भारत को एक वैश्विक वस्त्र विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने का है। नवी मुंबई में वस्त्र समिति, नवी मुंबई महानगरपालिका, साहस फाउंडेशन और महिला स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से संचालित परियोजना के माध्यम से 3,323 किलोग्राम टेक्सटाइल वेस्ट को लैंडफिल और दहन से बचाया गया। इस पहल के तहत 12,000 से अधिक परिवारों तक पहुंच बनायी गयी, 80 से अधिक संग्रह पात्र स्थापित किए गए, और 1,000 से अधिक नमूना उत्पाद विकसित किए गए। भारत की सोच ‘वेस्ट टू वेल्थ’ पर केंद्रित है, जो वेस्ट को उपयोगी मानकर अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाने का प्रयास करती है। यह दृष्टिकोण न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है, बल्कि स्थानीय रोजगार, महिला सशक्तीकरण, और नयी आर्थिक संभावनाओं का भी माध्यम बन सकता है। आज दुनिया के प्रमुख ब्रांड अपनी आपूर्ति शृंखला के लिए अधिक सख्त टिकाऊ मानक तय कर रहे हैं। वैश्विक ग्राहक भी ऐसे उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनमें रीसाइकल्ड सामग्री का उपयोग हो। इस प्रकार, टिकाऊपन अब केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं रह गया, बल्कि यह वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा और निर्यात का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। भारत ने 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी उद्देश्य से यूनाइटेड नेशंस इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन और अन्य साझेदार संस्थाओं के सहयोग से महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन पहलों के तहत खतरनाक रसायनों के उपयोग में कमी, जल संरक्षण, और ऊर्जा दक्षता पर ध्यान दिया जा रहा है। सर्कुलर इकोनॉमी भारत के लिए नयी अवधारणा नहीं है। यह मॉडल दिखाता है कि सस्टेनेबिलिटी पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रहकर, अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को भी प्रभावित कर सकती है। आज इसका आकार करीब 196 अरब डॉलर का है, जिसके 2030 तक 350 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। वस्त्र उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को अधिक स्वच्छ, संसाधनों की बेहतर बचत करने वाली और कम उत्सर्जन वाली बनाना जरूरी है। भारत का वस्त्र उद्योग 4.9 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है। यह उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। टेक्स इको कार्यक्रम के माध्यम से हरित विनिर्माण, फाइबर सुरक्षा, पारंपरिक वस्त्र क्लस्टरों का विकास, और कौशल विकास को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। यह कार्यक्रम न सिर्फ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार है, बल्कि यह रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है। भारत में वस्त्र उद्योग का महत्व बढ़ता जा रहा है, और यह उद्योग हरित प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण में नई पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर है।
समाचार
भारत का टेक्सटाइल उद्योग: वैश्विक स्तर पर 350 अरब डॉलर का लक्ष्य
29 सितंबर 2026 को 10:59 pm बजे

भारत का टेक्सटाइल उद्योग: वैश्विक स्तर पर 350 अरब डॉलर का लक्ष्य
