मध्य प्रदेश के महेश्वर में नर्मदा घाट पर 343 वोटर आईडी कार्ड मिलने से सियासी पारा चढ़ा, कांग्रेस ने भाजपा पर साजिश का आरोप लगाया
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के अंतर्गत आने वाली धार्मिक नगरी महेश्वर में नर्मदा घाट पर रविवार को सफाई के दौरान बड़ी संख्या में वोटर आईडी कार्ड मिले हैं। इन वोटर आईडी कार्डों की संख्या 343 बताई जा रही है, जिन पर इंदौर के अलग-अलग इलाकों के निवासियों के नाम दर्ज हैं। इस घटना ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि यह वोट चोरी की साजिश का हिस्सा है और भाजपा इस कृत्य के माध्यम से मतदाताओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रही है। प्रदेश कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर इस मुद्दे को उठाते हुए लिखा कि, 'इंदौर के वोटर आईडी कार्ड बड़ी संख्या में महेश्वर में मिले! वोट चोरी में जुटी भाजपा की साज़िशें अब एक-एक कर सामने आ रही हैं! आखिर इंदौर के इतने बड़े पैमाने पर वोटर आईडी कार्ड महेश्वर में कैसे पहुंचे? इन्हें वहाँ किसने और क्यों फेंका? क्या मतदाताओं के अधिकारों के साथ कोई बड़ा खेल किया जा रहा है? ' कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं, यह पूछते हुए कि क्या वह इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच करेगा या 'हमेशा की तरह आंखें मूंदकर बैठा रहेगा'। खरगोन से कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर पोस्ट करते हुए भाजपा को वोट चोरी के आरोपों से घेरा। वर्मा ने लिखा कि, 'वोट चोरी से प्रदेश में बनी भाजपा सरकार। इंदौर के वोटर आईडी कार्ड महेश्वर में बड़ी संख्या में मिलना बेहद गंभीर मामला है। सवाल सीधा है- इंदौर के मतदाताओं के पहचान पत्र महेश्वर तक कैसे पहुंचे? इन्हें वहां किसने पहुंचाया और किसके इशारे पर फेंका गया? ' सज्जन सिंह वर्मा ने इस घटना को केवल लापरवाही नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकारों से खिलवाड़ बताया है। उन्होंने केंद्र और राज्य निर्वाचन आयोग से तत्काल निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों को बेनकाब करने की मांग की है। उनका कहना है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को देश की जनता को जवाब देना होगा कि मतदाता सूची की सुरक्षा और चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित करना आखिर किसकी जिम्मेदारी है। यह मामला सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा से जुड़ा है। कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है। पार्टी के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में 1 नवंबर को दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन होने वाला है। इस आंदोलन में लोकतंत्र, मताधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े सवालों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा। वोटर कार्डों का इस तरह कूड़े में मिलना, वह भी नर्मदा घाट जैसी पवित्र जगह पर, देश की जनता के लिए चिंता का विषय है। कांग्रेस जानना चाहती है कि आखिर इन मतदाता पहचान पत्रों की जवाबदेही किसकी है और क्या मतदाता के अधिकारों की रक्षा होगी या इन सवालों को दबा दिया जाएगा। यह घटना महेश्वर के नर्मदा घाट पर हुई, जो एक धार्मिक स्थल है। रविवार को सफाई अभियान के दौरान जब स्थानीय कर्मचारी घाट की सफाई कर रहे थे, तब उन्हें बड़ी संख्या में वोटर आईडी कार्ड मिले। इन कार्डों पर इंदौर के मतदाताओं के नाम और पते अंकित थे, जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि यह वोटर आईडी कार्ड इंदौर से संबंधित हैं। इन कार्डों का महेश्वर जैसे दूरस्थ स्थान पर मिलना कई सवाल खड़े करता है।

