हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्ति के बाद 300 दिन के अर्जित अवकाश के नकदीकरण की राशि नहीं मिलने के मामले में संबंधित सक्षम अधिकारी को 90 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि अधिकारी अभ्यावेदन पर विचार कर कारणयुक्त आदेश पारित करें और निर्णय से याचिकाकर्ता को अवगत कराएं। यह मामला पन्ना जिले के पवई क्षेत्र के निवासी जागेश्वर प्रसाद पांडे से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार बाजपेई ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि वे 31 जनवरी, 2025 को सेवानिवृत्त हुए थे। पांडे ने अपने 300 दिन के अर्जित अवकाश के नकदीकरण की राशि दिलाने और भुगतान में देरी पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने की मांग की थी। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में प्रस्तुत अभ्यावेदन पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। राज्य शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह बघेल ने अदालत को आश्वासन दिया कि सक्षम अधिकारी अभ्यावेदन पर नियमानुसार विचार करेगा। उन्होंने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। 14 अगस्त, 2026 को पारित अपने आदेश में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे अपना अभ्यावेदन, संबंधित दस्तावेज और न्यायालय के आदेश की प्रति सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके बाद, अधिकारी को प्रमाणित आदेश प्राप्त होने के 90 दिन के भीतर इस मामले पर अंतिम निर्णय लेना होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्णय कारणयुक्त और लिखित होना चाहिए।
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हाईकोर्ट का निर्देश: 300 दिन के अर्जित अवकाश पर 90 दिन में निर्णय लें
29 अक्टूबर 2026 को 10:40 pm बजे

हाईकोर्ट का निर्देश: 300 दिन के अर्जित अवकाश पर 90 दिन में निर्णय लें
