उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में रविवार को शरद पूर्णिमा का पर्व उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर प्रबंध समिति ने परंपरा का निर्वहन करते हुए नैवेद्य कक्ष में स्थापित भगवान को मेवा युक्त मीठे दूध की खीर का भोग लगाया। संध्या आरती के बाद इस प्रसाद का वितरण भक्तों के बीच किया गया। यह आयोजन मंदिर की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है। शरद पूर्णिमा के उत्सव के साथ ही, मंदिर में 27 अक्टूबर, मंगलवार से आरतियों के समय में महत्वपूर्ण बदलाव लागू होने जा रहा है। यह नया शेड्यूल कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक प्रभावी रहेगा, जिससे श्रद्धालुओं को दैनिक पूजा-अर्चना के लिए नए समय सारिणी का पालन करना होगा। यह परिवर्तन मंदिर प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया है। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा जारी नई समय-सारिणी के अनुसार, कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक तीन प्रमुख आरतियों के समय में परिवर्तन किया गया है। प्रातः दद्योदक आरती अब सुबह 7:30 बजे से शुरू होकर 8:15 बजे तक संपन्न होगी। इसी प्रकार, भोग आरती सुबह 10:30 बजे से 11:15 बजे तक आयोजित की जाएगी। संध्या आरती का समय भी बदला गया है, जो अब शाम 6:30 बजे से 7:15 बजे तक चलेगी। यह नई व्यवस्था फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तक जारी रहेगी, जिसके बाद संभवतः फिर से पुराने समय पर आरती शुरू हो सकती है। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे दर्शन की योजना बनाते समय इन बदले हुए आरती समय का विशेष ध्यान रखें ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके। यह बदलाव विशेष रूप से उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है जो नियमित रूप से मंदिर आकर पूजा-अर्चना करते हैं। आरतियों के समय में बदलाव के बावजूद, मंदिर की कुछ प्रमुख और अति महत्वपूर्ण पूजन विधियों के समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। भस्म आरती, जो कि मंदिर की सबसे प्रमुख और अलौकिक आरती मानी जाती है, अपने पूर्व निर्धारित समय सुबह 4 बजे से 6 बजे तक ही होगी।
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27 अक्टूबर से महाकाल मंदिर की आरतियों का समय बदलेगा
25 अक्टूबर 2026 को 11:54 pm बजे
27 अक्टूबर से महाकाल मंदिर की आरतियों का समय बदलेगा
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