कान की सर्जरी में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नई राहें खोल रहे हैं। इन उन्नत तकनीकों से जटिल ऑपरेशनों को पहले से कहीं अधिक सटीक और सुरक्षित बनाने की उम्मीद है। दुनिया भर में कान की सर्जरी के लिए विकसित किए गए रोबोटिक सिस्टम जल्द ही भारत में भी उपलब्ध हो सकते हैं। यह जानकारी कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित न्यूरो-ओटोलॉजिकल एंड इक्विलिब्रिमेट्रिक सोसाइटी ऑफ इंडिया (एनईएससीओएन) के 44वें राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में सामने आईएम्स जोधपुर के ईएनटी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. अमित गोयल ने नईदुनिया से बातचीत में बताया कि इस वर्ष या अगले साल तक कुछ रोबोटिक सिस्टम भारत में आ सकते हैं, हालांकि इनकी निश्चित समय-सीमा अभी तय नहीं है। डॉ. गोयल ने स्पष्ट किया कि रोबोटिक्स और एआई दो अलग-अलग तकनीकें हैं, लेकिन इनका संयोजन सर्जरी की योजना बनाने, अत्यंत सूक्ष्म प्रक्रियाओं को अंजाम देने और उपचार संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लेने में बेहद मददगार साबित हो सकता है। रोबोटिक सिस्टम डॉक्टरों को सूक्ष्म गतिविधियों में अभूतपूर्व सहायता प्रदान कर सकते हैं, वहीं एआई विभिन्न जांचों और मेडिकल डेटा का गहराई से विश्लेषण करके उपचार के लिए सर्वोत्तम विकल्पों का सुझाव दे सकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में दुनिया भर में कान की सर्जरी के लिए कम से कम चार रोबोटिक सिस्टम उपयोग में हैं। भारत में इनकी उपलब्धता कई कारकों पर निर्भर करेगी, जिनमें इनका वास्तविक चिकित्सकीय उपयोग, प्रमाणन, लागत, अस्पतालों की आवश्यक सुविधाएं और इन तकनीकों के संचालन में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की उपलब्धता शामिल है। सम्मेलन के दूसरे दिन कान से जुड़ी विभिन्न बीमारियों और उनके आधुनिक सर्जिकल उपचारों पर गहन चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बहरेपन, चेहरे की नसों के विकार, कान की हड्डियों के कैंसर, स्कल बेस संक्रमण और ट्यूमर जैसी गंभीर समस्याओं के उपचार पर अपने बहुमूल्य अनुभव साझा किए। इस दौरान, जयपुर की डॉ. अनीता भंडारी ने हेडफोन और ईयरबड के लंबे समय तक तेज आवाज में इस्तेमाल से होने वाले संभावित नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आगाह किया कि इस तरह की आदत से कानों में लगातार घंटी या सीटी जैसी आवाजें सुनाई देने की समस्या, जिसे टिनिटस कहा जाता है, उत्पन्न हो सकती है। डॉ. भंडारी ने श्रवण स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवाज को कम रखने और नियमित अंतराल पर कानों को आराम देने की सलाह दी। बहरेपन के उपचार में हो रहे शोध और नवाचारों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। एसएमएस जयपुर के डॉ. पवन सिंघल ने इस विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) जैसी उभरती तकनीकों की भूमिका पर प्रकाश डाला। मुंबई से आए डॉ. केपी मोरवानी ने कान की आधुनिक सर्जरी की नवीनतम तकनीकों और प्रगति पर अपने विचार प्रस्तुत किए। चेहरे की नसों से संबंधित विकारों के उपचार पर डॉ. माधुरी मेहता, डॉ. हिमांशु और डॉ. राहुल अग्रवाल ने अपने विशेषज्ञ विचार साझा किए। कान की हड्डियों से जुड़ी सर्जरी के क्षेत्र में डॉ. मुबारक खान और डॉ. राजीव कपिला ने महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। इस सत्र का सफल संचालन डॉ. अमित केशरी ने किया। स्कल बेस संक्रमण, कैंसर और ट्यूमर जैसी अत्यंत जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं पर डॉ. डार्विन कौशल, डॉ. अमोल पाटिल, डॉ. यशवीर जेके, डॉ. राजीव कुमार और डॉ. निजेखोतुओ ब्रायन शुन्यु जैसे विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे अन्य चिकित्सकों को सीखने का अवसर मिला। चक्कर आना और संतुलन से जुड़ी विभिन्न बीमारियों के निदान और उपचार पर डॉ. अजय वत्स और डॉ. श्रीनिवास दोरासला ने विस्तृत व्याख्यान दिए। इन व्याख्यानों ने इन दुर्बल करने वाली स्थितियों से पीड़ित रोगियों के लिए नई उम्मीदें जगाईं। एनईएससीओएन 2026 सम्मेलन में ईएनटी विशेषज्ञों ने न केवल कान की संरचनाओं और सुनने की क्षमता से जुड़े अंगों की सर्जरी में रोबोटिक्स और एआई की भूमिका पर चर्चा की, बल्कि इन तकनीकों की व्यावहारिकता और भारत में इनकी उपलब्धता की संभावनाओं का भी आकलन किया।
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कान की सर्जरी में रोबोटिक्स और एआई की एंट्री, एनईएससीओएन-2026 में जुटे विशेषज्ञ
25 अक्टूबर 2026 को 11:53 pm बजे

कान की सर्जरी में रोबोटिक्स और एआई की एंट्री, एनईएससीओएन-2026 में जुटे विशेषज्ञ
