दीपावली पर रायसेन शहर करीब 2 लाख दीयों की रोशनी से जगमगाएगा, लेकिन इस बार इस रोशनी में स्थानीय कुम्हारों के हाथों की मेहनत की चमक कम होगी। शहर के करीब 70 फीसदी पारंपरिक कुम्हारों के चाक थम चुके हैं, जिसकी वजह दीये बनाने के लिए जरूरी चिकनी मिट्टी की किल्लत है। हालात ऐसे हैं कि पुश्तैनी हुनर रखने वाले कारीगर अब खुद दीये बनाने के बजाय कटनी और दमोह से रेडीमेड दीये मंगवाकर बेचने को मजबूर हैं। यह स्थिति उन परिवारों के लिए चिंताजनक है जो पीढ़ियों से दीये बनाकर बाजार में उतारते आए हैं। वे अब निर्माता नहीं, सिर्फ रीसेलर बनकर रह गए हैं। त्योहार को देखते हुए शहर के मुख्य बाजारों, चौराहों और फुटपाथों पर दीयों की दुकानें सज गई हैं। व्यापारियों के अनुमान के मुताबिक, धनतेरस से दीपावली तक घरों, दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में करीब 2 लाख दीयों की खपत होगी।
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दीपावली पर रायसेन शहर 2 लाख दीयों से रोशन, पर कुम्हारों का हुनर मिट्टी की किल्लत से बेदम
8 नवंबर 2026 को 8:52 pm बजे
