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श्रम विभाग ने कार्यस्थलों पर लैंगिक भेदभाव समाप्त करने और समान पारिश्रमिक सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। यह एडवाइजरी समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन कराने पर केंद्रित है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी कारखानों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, शासकीय संस्थानों और अन्य कार्यस्थलों पर पुरुष और महिला श्रमिकों को समान कार्य के लिए समान वेतन देना अनिवार्य है। इस नियम का उल्लंघन किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। विभाग का यह कदम कार्यस्थल पर महिलाओं को समान अवसर और सम्मान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। जारी किए गए पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि केवल वेतन ही नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान भी किसी भी प्रकार का लैंगिक भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। इसका अर्थ है कि नौकरी के लिए आवेदन करने वाली महिलाओं के साथ उनकी नियुक्ति या पदोन्नति के संबंध में कोई पक्षपात नहीं होना चाहिए। विभाग ने सभी नियोक्ताओं से अपेक्षा की है कि वे इस निर्देश का पालन करें और एक निष्पक्ष कार्य वातावरण बनाएं जहां सभी को समान अवसर मिलें। यह सुनिश्चित करेगा कि महिलाएं अपनी योग्यता और क्षमता के आधार पर आगे बढ़ सकें, न कि किसी पूर्वाग्रह के कारण पीछे रह जाएं। समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976, भारत में लैंगिक वेतन असमानता को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण कानून है। यह अधिनियम पुरुषों और महिलाओं के बीच मजदूरी में भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। श्रम विभाग की यह नई एडवाइजरी इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए लाई गई है। विभाग का मानना है कि इस एडवाइजरी के माध्यम से नियोक्ताओं को उनकी जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक किया जाएगा और वे समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत का पालन करेंगे। यह न केवल महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा बल्कि कार्यस्थल पर उत्पादकता और सद्भाव को भी बढ़ावा देगा। इसके अतिरिक्त, वे राज्य सरकार के CM हेल्पलाइन पोर्टल का भी उपयोग कर सकते हैं।
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