ग्राम नवलगांव के 11 माह के मासूम कृष बारेला की जान मां के हौसले और एनआरसी की टीम की मेहनत से बची। गंभीर कुपोषण, निमोनिया, तेज बुखार और खून की कमी से जूझ रहे कृष की हालत बेहद नाजुक थी, लेकिन मां सावित्री के साहस और एनआरसी की टीम के समर्पित प्रयासों से वह आज स्वस्थ होकर मुस्कुराने लगा है। जब कृष को एनआरसी में भर्ती कराया गया, तब उसका वजन मात्र 4.920 किलोग्राम, बांह की परिधि 10.2 सेंटीमीटर और हीमोग्लोबिन स्तर केवल 6.2 ग्राम था। वह गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम), निमोनिया, तेज बुखार, भूख की कमी और एनीमिया से पीड़ित था। ओपीडी में जांच के दौरान एनआरसी की फीडिंग डेमोंस्ट्रेटर एफडी नेहा मालवीय ने उसकी गंभीर स्थिति को पहचानकर मां सावित्री को तत्काल भर्ती कराने की सलाह दी और समझाया कि देरी बच्चे के लिए जानलेवा हो सकती है। सावित्री ने जब परिजनों को एनआरसी में भर्ती कराने की बात बताई, तो सामाजिक अज्ञानता और रूढ़िवादी सोच के कारण उन्होंने बच्चे को वहां भर्ती करने से मना कर दिया। मां ने हार नहीं मानी और अपने बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए उसे लेकर एनआरसी पहुंच गई। एनआरसी में कृष की 24 घंटे निगरानी और चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार शुरू किया गया। कृष को समय पर दवाइयां, चिकित्सा सुविधा और उच्च गुणवत्ता वाला विशेष चिकित्सीय पोषण आहार (थेराप्यूटिक डाइट) दिया गया। एफडी नेहा मालवीय ने भी मां को बच्चे के पोषण और देखभाल के संबंध में लगातार मार्गदर्शन दिया। नियमित उपचार और पोषण से धीरे-धीरे कृष की भूख बढ़ने लगी, संक्रमण दूर हुआ और उसकी सुस्ती खत्म होने लगी। लगातार 20 दिनों के उपचार के बाद कृष को स्वस्थ होने पर छुट्टी दी गई।
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मां के हौसले और एनआरसी की देखभाल ने बचाई 11 माह के कृष की जिंदगी
8 नवंबर 2026 को 8:52 pm बजे
मां के हौसले और एनआरसी की देखभाल ने बचाई 11 माह के कृष की जिंदगी
