जिले में औसत से कम वर्षा होने के कारण कलेक्टर बालागुरू ने जल के सीमित और मितव्ययी उपयोग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। आगामी ग्रीष्म ऋतु हेतु पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जल आरक्षित रखने, बांधों, तालाबों और नहरों की मरम्मत व रखरखाव समय पर कराने पर विशेष जोर दिया गया
जिले में औसत से कम वर्षा होने के कारण कलेक्टर बालागुरू ने जल के सीमित और मितव्ययी उपयोग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आगामी ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जल आरक्षित रखने, बांधों, तालाबों और नहरों की मरम्मत व रखरखाव समय पर कराने पर जोर दिया। यह निर्देश जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक में दिए गए, जिसकी अध्यक्षता कलेक्टर बालागुरू ने जिला पंचायत सभाकक्ष में की। बैठक में वर्ष 2026 में जिले के जलाशयों में उपलब्ध जल भंडारण, रबी फसल के सिंचाई लक्ष्यों और पेयजल के लिए जल आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा और समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कहा कि पेयजल की उपलब्धता सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसे बनाए रखने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। जिला जल उपयोगिता समिति की बैठक में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग के अंतर्गत कुल 283 सिंचाई योजनाएं निर्मित हैं, जिनकी कुल उपयोगी जल भंडारण क्षमता 230.11 मिलियन घन मीटर है। वर्तमान में, जलाशयों में 189.80 मिलियन घन मीटर जल संग्रहित है, जो कुल क्षमता का 82.50 प्रतिशत है। इस वर्ष औसत से कम वर्षा के कारण यह स्थिति चिंताजनक है। कलेक्टर ने अधिकारियों को वर्तमान परिस्थितियों और आगामी पेयजल व सिंचाई की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल भंडारण और वितरण का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल का अपव्यय रोकना और उपलब्ध जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना हम सबकी जिम्मेदारी है। कलेक्टर बालागुरू ने बैठक में उपस्थित किसानों से कहा कि जिले में इस वर्ष वर्षा सामान्य से कम रही है, इसलिए जल के सीमित और मितव्ययी उपयोग को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने किसानों से कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को अपनाने की अपील की। रबी फसल के लिए 80,232 हेक्टेयर सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

