श्रीलंकाई हिंदू इंजीनियर सिवारसा अनोजन को सऊदी अरब में मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं बढ़ा दी हैं। सिवारसा, जो एक बैटरी बनाने वाली फैक्ट्री में काम करते थे, को सोशल मीडिया पर एक तमिल मुस्लिम के साथ विवाद के दौरान की गई टिप्पणी के लिए यह कठोर सजा दी गई है। यह मामला तब और भी पेचीदा हो जाता है जब कई मुस्लिम भी इस सजा पर आपत्ति जता रहे हैं, लेकिन भारतीय हिंदू नेताओं और संगठनों का रुख आश्चर्यजनक रूप से मौन है। यह मौन न केवल अनुचित है, बल्कि उन घटनाओं की याद दिलाता है जो भारत में भी होती रही हैं, जिन पर राजनीतिक और बौद्धिक वर्ग की चुप्पी ने एकतरफा अत्याचार को बढ़ावा दिया है। घटना की जड़ें 27 जून को श्रीलंका के कतरगामा में भगवान मुरुगन की तीर्थयात्रा के दौरान भड़कीं, जब एक मुस्लिम द्वारा तीर्थयात्रियों के पीछे चल रहे कुत्ते को लात मारने का वीडियो बनाया गया। इस पर एक फेसबुक टिप्पणी में किसी ने भगवान शिव के बारे में अपमानजनक बात कही। सिवारसा ने तमिल में पैगंबर मोहम्मद पर एक टिप्पणी कर जवाब दिया। हालांकि, उन्होंने दस मिनट के भीतर अपनी टिप्पणी हटा दी और माफी भी मांग ली। दुर्भाग्यवश, किसी ने टिप्पणी का स्क्रीनशॉट लेकर सिवारसा की सऊदी कंपनी के मालिक को भेज दिया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। शुरुआत में सिवारसा को पांच साल की कैद और 30 लाख सऊदी रियाल के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। लेकिन गत 17 सितंबर को अपीलीय अदालत ने शरीयत कानून के तहत इस सजा को बढ़ाकर मृत्युदंड कर दिया।
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सऊदी अरब में श्रीलंकाई हिंदू की मृत्युदंड सजा पर भारत की खामोशी, बुद्धिजीवियों से सवाल
14 अक्टूबर 2026 को 11:19 pm बजे
