अनुच्छेद 44 समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का निर्देश देता है, जो मौलिक है
विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से संबंधित नागरिक कानून व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा, पारिवारिक सुरक्षा को सुदृढ़ और महिलाओं को उचित व्यवहार सुनिश्चित करने के तरीकों की जांच के लिए संविधान एक ढांचा प्रदान करता है। अनुच्छेद 44, राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के तहत, राज्य को पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करने का निर्देश देता है। यह प्रावधान सीधे लागू करने योग्य नहीं है, लेकिन अनुच्छेद 37 यह घोषित करता है कि निर्देशक सिद्धांत देश के शासन के लिए मौलिक हैं। अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता और समान संरक्षण की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 15 धर्म और लिंग सहित विभिन्न आधारों पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है। समान नागरिक संहिता का एक संभावित लाभ पारिवारिक मामलों में महिलाओं के लिए मजबूत कानूनी संरक्षण है। विवाह में पति-पत्नी दोनों के अधिकार और जिम्मेदारियां शामिल होती हैं, और कानून को उपेक्षा या संबंध टूटने की स्थिति में प्रभावी सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। विवाह पंजीकरण और तलाक के लिए स्पष्ट कानूनी प्रक्रियाएं वैवाहिक स्थिति स्थापित करने, विवादों को कम करने और कानूनी सुरक्षा की आवश्यकता होने पर दस्तावेजी साक्ष्य प्रदान करने में मदद कर सकती हैं। मुस्लिम महिलाओं के लिए, ऐसे सुरक्षा उपाय अधिक कानूनी निश्चितता प्रदान कर सकते हैं, जिससे वे अनावश्यक बाधाओं के बिना अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकें। एक समान ढांचा उत्तराधिकार प्रक्रियाओं को स्पष्ट कर सकता है, परिवारों को उनके कानूनी अधिकारों की पहचान करने में मदद कर सकता है और संपत्ति विवादों के दौरान अनिश्चितता को कम कर सकता है। समान नागरिक ढांचा समान नागरिकता की बेहतर समझ विकसित करने में भी योगदान दे सकता है। अनुच्छेद 25 अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने के अधिकार की रक्षा करता है। कानून निर्माताओं के लिए चुनौती एक ऐसा ढांचा तैयार करना है जो संवैधानिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए समानता को बढ़ावा दे। अकील आजाद/ईएमएस/24/10/2026 (24/10/2026)।
