पंचांग के अनुसार बन रहा विशेष संयोग
हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का पर्व विशेष महत्व रखता है। शारदीय नवरात्रि के ठीक बाद आने वाली इस पूर्णिमा को रास पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र रात्रि को चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत वर्षा करता है। यही कारण है कि इस दिन विशेष रूप से खीर बनाकर उसे चांदनी रात में रखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। बालाजी ज्योतिष अनुसंधान एवं परामर्श केंद्र के ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ गणेश शर्मा ने बताया कि इस वर्ष शरद पूर्णिमा की तिथि और व्रत-दान को लेकर पंचांग के अनुसार एक विशेष संयोग बन रहा है। पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा का व्रत 25 अक्टूबर को रखा जाएगा। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर आरंभ होगी। चूंकि पूर्णिमा तिथि इस दिन की रात्रि में भी व्याप्त रहेगी, इसलिए चंद्रमा की पूजा और खीर को चांदनी में रखने का मुख्य विधान 25 अक्टूबर की रात को ही किया जाएगा। इस रात को चंद्रमा की किरणों में औषधीय और अमृत गुण समाहित हो जाते हैं, ऐसा माना जाता है। इस पर्व की सबसे लोकप्रिय परंपरा खुले आसमान के नीचे खीर रखना है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में औषधीय और अमृत गुण समाहित हो जाते हैं। पंडित सौरभ गणेश शर्मा के अनुसार, इस पर्व पर भगवान चंद्रमा की आराधना का विधान है। संध्याकाल में चंद्रोदय के पश्चात चंद्रमा को विधि-विधान से अघ्र्य दिया जाता है। इसके बाद धूप और दीप प्रज्वलित कर मां लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा की जाती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहे। वहीं अगले दिन, यानी 26 अक्टूबर को स्नान, दान और अन्य पुण्य कर्म किए जाएंगे। धार्मिक अनुष्ठानों में दान-पुण्य के लिए उदया तिथि का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मानी जाएगी, इसलिए दान-पुण्य जैसे शुभ कार्य इस दिन किए जाएंगे। यह पर्व जहां धार्मिक महत्व रखता है, वहीं ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसका विशेष संयोग बन रहा है। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और माना जाता है कि इस रात वह अमृत बरसाता है। इस अमृत वर्षा का लाभ उठाने के लिए खीर बनाकर उसे रात भर चांदनी में रखा जाता है। यह खीर प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है। यह परंपरा न केवल सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी मान्यताएं भी हैं। चांदनी रात में रखी गई खीर को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। पंडित सौरभ गणेश शर्मा ने बताया कि इस रात्रि को मां लक्ष्मी भी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और भक्तों को धन-धान्य का आशीर्वाद देती हैं। इसलिए इस दिन रात्रि जागरण कर मां लक्ष्मी का पूजन करने का भी विधान है। कोजागरी का अर्थ है 'कौन जाग रहा है'। मान्यता है कि मां लक्ष्मी रात्रि में देखती हैं कि कौन जाग रहा है और उनकी पूजा कर रहा है, और वे उसे धन-संपत्ति का वरदान देती हैं। इसलिए इस रात को जागरण का विशेष महत्व है।

