मध्य प्रदेश में गेहूं, चना और सरसों जैसी मुख्य रबी फसलों की बुआई शुरू होने से ठीक पहले राज्य के लाखों किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी राहत भरी खबर आई है। इस बार रबी सीजन के दौरान प्रदेश में यूरिया के संकट या खाद के लिए लगने वाली लंबी कतारों से किसानों को मुक्ति मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरिया की आपूर्ति बढ़ने से वैश्विक कीमतों में करीब 10 प्रतिशत तक की नरमी आई है, जिसका सीधा असर देश और मध्य प्रदेश में खाद की सुचारु उपलब्धता के रूप में दिखेगा। मध्य प्रदेश में रबी सीजन के दौरान हर साल यूरिया की भारी मांग रहती है। चंबल, मालवा, नर्मदापुरम् और बुंदेलखंड जैसे कृषि प्रधान अंचलों में बुआई के समय यूरिया वितरण केंद्रों पर भारी भीड़ देखने को मिलती थी। केंद्र सरकार द्वारा इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) के माध्यम से जारी किए गए 17 लाख टन यूरिया आयात के टेंडर में इस बार कीमतें घटकर 352 से 356 डॉलर प्रति टन पर आ गई हैं, जो अगस्त में 390 से 394 डॉलर प्रति टन थीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया सस्ता होने और भारत को मांग से तीन गुना अधिक (करीब 53.5 लाख टन) यूरिया की पेशकश मिलने से अब मध्य प्रदेश के सभी जिलों में यूरिया का बफर स्टॉक समय पर पहुँचाना आसान हो जाएगा। इससे रबी सीजन की बुआई के लिए किसानों को खाद की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने के बावजूद किसानों को यूरिया बैग की दरों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि भारत में 45 किलोग्राम वाले यूरिया बैग का खुदरा मूल्य सरकार द्वारा 242 रुपये पर नियंत्रित (फिक्स) रखा जाता है। यह व्यवस्था किसानों को यूरिया की अधिक कीमत चुकाने से बचाती है, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें ऊपर-नीचे होती रहें। हालांकि, वैश्विक दरें घटने का सबसे बड़ा फायदा सरकार को मिलेगा। आयात सस्ता होने से सरकार पर उर्वरक सब्सिडी का आर्थिक बोझ कम होगा। यह बचत सरकार को अन्य कृषि-समर्थक योजनाओं में निवेश करने या किसानों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुँचाने के अवसर प्रदान कर सकती है। इस आर्थिक राहत से मध्य प्रदेश जैसे बड़े कृषि राज्यों में खाद की कालाबाजारी पर अंकुश लगाने और समयबद्ध वितरण व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी। सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि खाद जरूरतमंद किसानों तक सही समय पर और उचित मूल्य पर पहुंचे। राज्य सरकार ने रबी फसलों की बुआई के लिए आवश्यक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पहले से ही कई कदम उठाए हैं। इसमें भंडारण क्षमता बढ़ाना और वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ करना शामिल है। किसानों को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए विभाग लगातार निगरानी रख रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में आई नरमी के कारण भारत को सस्ते दामों पर बड़ी मात्रा में यूरिया उपलब्ध हो रहा है। यह स्थिति न केवल देश की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि कृषि क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होगी। किसानों को रबी सीजन में यूरिया की किल्लत से मुक्ति मिलने की उम्मीद है।
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रबी फसलों की बुआई से पहले एमपी के किसानों को खुशखबरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया सस्ता होने से किल्लत की आशंका समाप्त
14 अक्टूबर 2026 को 11:19 pm बजे

रबी फसलों की बुआई से पहले एमपी के किसानों को खुशखबरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया सस्ता होने से किल्लत की आशंका समाप्त
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