उज्जैन में अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने दशहरे पर होने वाले रावण दहन के विरोध का ऐलान किया है। समाज का कहना है कि रावण दहन शास्त्र सम्मत नहीं है और अब यह केवल राजनीति और मनोरंजन का आधार बन गया है। इस परंपरा को बंद करने की मांग को लेकर संगठन ने शहर के चार प्रमुख रावण दहन आयोजनों के आयोजकों को वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजे हैं। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे किसी भी हद तक जाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे और कानूनी कार्रवाई भी करेंगे। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संरक्षक महेश पुजारी ने कहा कि रावण ने जो भी किया, उसकी सजा भगवान राम उसे दे चुके हैं। ऐसे में अब उसके पुतले का दहन करने की परंपरा को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि रावण के पुतले को मनोरंजन के तौर पर पेश करना उचित नहीं है। समाज को इस मामले में न्याय मिलना चाहिए। संगठन ने रावण दहन को विधि और शास्त्र सम्मत नहीं बताते हुए इसे बंद करने की पुरजोर मांग की है। पिछले साल भी अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने दशहरे के पर्व पर रावण दहन का विरोध किया था। उस समय भी संगठन ने रावण दहन को बंद करने की मांग उठाई थी। समाज के कार्यकर्ताओं ने मुख्य आयोजन से पहले रावण के पुतले के सामने रावण के जयकारे लगाए थे और काली मटकियां फोड़कर रावण दहन रोकने की मांग की थी। यह दर्शाता है कि यह विरोध नया नहीं है, बल्कि पिछले वर्ष से ही जारी है। संगठन ने शहर में दशहरा मैदान, शास्त्री नगर, कार्तिक मेला ग्राउंड और नानाखेड़ा में होने वाले रावण दहन के आयोजकों को कानूनी नोटिस भेजे हैं। इन आयोजनों को शहर के सबसे बड़े और प्रमुख रावण दहन कार्यक्रमों में गिना जाता है। नोटिस के माध्यम से आयोजकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस परंपरा को बंद करें। संगठन का मानना है कि यह प्रथा अब सामाजिक और धार्मिक मूल्यों के विपरीत हो चली है। महेश शर्मा, जो ब्राह्मण समाज से जुड़े हैं, ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि रावण के पुतले को केवल मनोरंजन के लिए जलाना सही नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रावण दहन की प्रथा का कोई धार्मिक या शास्त्र सम्मत आधार नहीं है। उनका कहना है कि इस तरह की प्रथाएं समाज में गलत संदेश देती हैं और इन्हें बंद किया जाना चाहिए। समाज को ऐसे मुद्दों पर न्याय मिलना आवश्यक है। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो वे इसे रोकने के लिए हर स्तर पर विरोध करेंगे। इसके लिए वे अदालत का दरवाजा खटखटाने और आंदोलन को व्यापक बनाने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं ताकि इस परंपरा को समाप्त किया जा सके। यह विरोध समाज के धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए उठाया गया कदम है। यह विरोध केवल उज्जैन तक ही सीमित नहीं है। संगठन ने देश और प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी रावण दहन के विरोध में आवाज उठाई है। उज्जैन के अलावा अन्य स्थानों पर भी संगठन की ओर से रावण के गुणगान वाले पोस्टर लगाए गए थे, जो इस बात का संकेत देते हैं कि समाज की नाराजगी व्यापक है। यह दिखाता है कि यह मुद्दा केवल एक शहर का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर समाज के एक वर्ग के लिए चिंता का विषय है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज इससे पहले भी रावण दहन पर रोक लगाने की मांग कर चुका है। संगठन ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर अपनी मांग रखी थी। इन उच्च-स्तरीय नेताओं से हस्तक्षेप की उम्मीद के साथ, संगठन ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का प्रयास किया है। उनका तर्क है कि रावण ने जो कृत्य किए थे, उसके लिए उसे भगवान राम द्वारा दंडित किया जा चुका है। इसलिए, अब उसके पुतले को जलाना एक निरर्थक और अनुचित कार्य है। यह धार्मिक भावनाओं का अनादर है और समाज में गलत परंपराओं को बढ़ावा देता है।
समाचार
ब्राह्मण समाज ने रावण दहन को बताया शास्त्र सम्मत नहीं, आयोजकों को भेजे कानूनी नोटिस
7 अक्टूबर 2026 को 11:25 pm बजे

ब्राह्मण समाज ने रावण दहन को बताया शास्त्र सम्मत नहीं, आयोजकों को भेजे कानूनी नोटिस
साझा करेंWhatsApp
