उज्जैन सिंहस्थ के लिए सड़क चौड़ीकरण पर हाईकोर्ट में याचिका दायर, निगम की कार्रवाई को छात्र ने दी चुनौती
उज्जैन में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के बीच नगर निगम द्वारा सड़क चौड़ीकरण के लिए की जा रही कार्रवाई को एक छात्र ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इंदौर निवासी छात्र सोमिल कराड़े ने निगम के आदेश को यह कहते हुए याचिका दायर की है कि यह प्रक्रिया केंद्रीय भूमि अधिग्रहण कानून के विपरीत है। इस मामले में हाईकोर्ट ने नगर निगम और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि निगम की कार्रवाई जारी रह सकती है, लेकिन वह अंतिम निर्णय के अधीन होगी। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि केंद्रीय सरकार द्वारा कुछ साल पहले पारित भूमि अधिग्रहण कानून लागू होने के बाद, राज्य सरकार के मध्य प्रदेश म्युनिसिपल एक्ट की धारा-305 का औचित्य समाप्त हो गया है। उनका कहना है कि भूमि अधिग्रहण कानून में दावे- आपत्ति बुलाकर मुआवजा तय करने की विस्तृत प्रक्रिया का पालन करना होता है। इसके विपरीत, निगम एक्ट में केवल नोटिस जारी करके ही जमीन का अधिग्रहण और निर्माण हटाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। नियमों के इस टकराव के कारण याचिका दायर की गई है। कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ के समक्ष कुछ महत्वपूर्ण सवाल उठाए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही सुभदा वाघमारे मामले में इस विषय पर निर्णय दे चुका है, तो फिर इस मामले में सुनवाई कैसे की जा सकती है। कोर्ट ने यह सवाल इसलिए उठाया क्योंकि वाघमारे मामले में भी इसी तरह के नियमों के टकराव का मुद्दा था। याचिका में कहा गया है कि सुभदा वाघमारे द्वारा कोर्ट में याचिका दायर करने के समय केंद्रीय भूमि अधिग्रहण कानून लागू नहीं हुआ था। याचिकाकर्ता का तर्क है कि जब केंद्रीय कानून लागू हो गया है, तो राज्य के पुराने अधिनियम की धारा- 305 को लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह केंद्रीय कानून के प्रावधानों से भिन्न है।

