मध्य प्रदेश के हजारों अध्यापकों के छठे वेतनमान और पुरानी सेवा अवधि के लाभ से जुड़े मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश का पालन करने के लिए अंतिम मोहलत दे दी है। शिक्षकों ने अपनी पहली नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना कर एक जनवरी 2006 से छठे वेतनमान सहित वरिष्ठता, वेतनवृद्धि, एरियर्स और पेंशन संबंधी लाभ देने की मांग की है। इस अहम मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को निर्धारित है, जिससे शिक्षकों की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं। जबलपुर निवासी राजेश कुमार पांडेय सहित कई अन्य शिक्षकों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर संविलियन से पहले की सेवा को भी मान्य करने की मांग की थी। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पंचायत विभाग में उनकी प्रारंभिक नियुक्ति के बाद वर्ष 2006 में वे अध्यापक संवर्ग में शामिल हुए थे, और फिर वर्ष 2018 में उनका स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किया गया। शिक्षकों का तर्क है कि उनकी सेवा काल की गणना पहली नियुक्ति तिथि से होनी चाहिए, न कि संविलियन की तारीख से। राज्य सरकार ने छठे वेतनमान का लाभ वर्ष 2016 से देने का निर्णय लिया था, जिसे शिक्षकों ने सीधे तौर पर चुनौती दी है। उनका मानना है कि इस निर्णय से उन्हें वित्तीय नुकसान हो रहा है और उनकी सेवा अवधि का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिक्षकों ने सरकार के इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए अपनी सेवा अवधि के अनुसार लाभ की मांग की है। हाई कोर्ट के पूर्व आदेश के विरुद्ध राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी, लेकिन 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले ने शिक्षकों को बड़ी राहत दी और उनके हक में एक महत्वपूर्ण जीत साबित हुई। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद मामला फिर से हाई कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद, करीब 497 शिक्षकों की ओर से हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। इसमें शिक्षकों ने अदालत के आदेश का पालन कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर आदेशों की अवहेलना कर रही है और उन्हें उनका हक नहीं दे रही है। इस अवमानना याचिका के बाद हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझा। 24 सितंबर को न्यायमूर्ति दीपक खोट की एकलपीठ ने राज्य सरकार को आदेश का पालन करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। इस दौरान सरकार को शिक्षकों की मांगों पर विचार कर उन्हें लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे। यह निर्देश सरकार के लिए एक स्पष्ट संकेत था कि उसे अदालत के आदेशों का सम्मान करना होगा। शिक्षक पक्ष के अनुसार, यदि पहली नियुक्ति से सेवा की गणना की जाती है, तो प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को इसका लाभ मिल सकता है। यह संख्या शिक्षकों के एक बड़े वर्ग को प्रभावित करेगी और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाएगी।
समाचार
अध्यापकों के संविलियन पूर्व सेवा को मान्य करने की मांग पर हाई कोर्ट ने सरकार को दी अंतिम मोहलत
24 अक्टूबर 2026 को 11:00 pm बजे

अध्यापकों के संविलियन पूर्व सेवा को मान्य करने की मांग पर हाई कोर्ट ने सरकार को दी अंतिम मोहलत
साझा करेंWhatsApp
