राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावसायिक कौशल और व्यावहारिक अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, किशुनगंज के 9वीं से 12वीं कक्षा के 63 विद्यार्थियों ने गौ-अभ्यारण्य जरारूधाम का शैक्षणिक भ्रमण किया। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि, गौपालन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में व्यावहारिक जानकारी देना रहा, ताकि वे भविष्य में इन क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर तलाश सकें। विषय शिक्षकों के मार्गदर्शन में, छात्रों ने गौ-अभ्यारण्य में संचालित विभिन्न परियोजनाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने गौसेवा के महत्व को समझा और जैविक खाद निर्माण संयंत्र, गोबर गैस संयंत्र, पौधरोपण, नर्सरी प्रबंधन और जल संरक्षण जैसी गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। इन सभी गतिविधियों ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया। भ्रमण के दौरान, विद्यार्थियों को पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया। 'गाय से व्यवसाय की ओर' विषय के अंतर्गत, उन्हें यह भी समझाया गया कि किस प्रकार गौपालन को एक व्यवहार्य आजीविका और स्वरोजगार के स्रोत के रूप में विकसित किया जा सकता है। छात्रों ने विभिन्न परियोजनाओं को देखकर यह सीखा कि कैसे गोबर और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके न केवल जैविक खाद और ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है, बल्कि कृषि कार्यों को भी अधिक प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सकता है। यह ज्ञान उन्हें भविष्य में स्थायी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। इस शैक्षणिक भ्रमण का समग्र लक्ष्य विद्यार्थियों को कक्षा की चारदीवारी से बाहर निकालकर व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था। इसके अतिरिक्त, यह उन्हें कृषि, पशुपालन और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार की अपार संभावनाओं के प्रति जागरूक करने का एक सफल प्रयास रहा। विद्यालय की ओर से, शिक्षक दिनेश पटेल, सुरेंद्र विश्वकर्मा, रवि अहिरवार और पूजा अहिरवार ने इस भ्रमण का नेतृत्व किया और विद्यार्थियों को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। उनकी उपस्थिति ने यह सुनिश्चित किया कि छात्र भ्रमण से अधिकतम लाभ उठा सकें और उन्हें सभी गतिविधियों की गहन जानकारी प्राप्त हो। भ्रमण के समापन पर, विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों ने नर्मदा खंड सेवा संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों की भरपूर सराहना की। उन्होंने संस्थान की गतिविधियों को समाज और पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और उनके प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। यह शैक्षणिक भ्रमण राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उन लक्ष्यों को पूरा करने में सहायक सिद्ध हुआ, जो शिक्षा को व्यावसायिक कौशल और व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ते हैं। विद्यार्थियों ने न केवल अकादमिक ज्ञान प्राप्त किया, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए महत्वपूर्ण जीवन कौशल भी मिले। गौ-अभ्यारण्य जरारूधाम में विद्यार्थियों को मिले व्यावहारिक ज्ञान ने उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाया है। उन्होंने सीखा कि कैसे प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करके हम एक स्थायी भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। जैविक खाद निर्माण संयंत्र और गोबर गैस संयंत्रों का अवलोकन कर छात्रों ने अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन के नवीन तरीकों को समझा। यह ज्ञान उन्हें भविष्य में ऐसे स्थायी समाधानों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। नर्सरी प्रबंधन और पौधरोपण जैसी गतिविधियों ने विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना को जागृत किया।
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विद्यार्थियों ने गौ-अभ्यारण्य में सीखा गौपालन और पर्यावरण संरक्षण का व्यावहारिक ज्ञान
14 अक्टूबर 2026 को 11:19 pm बजे

विद्यार्थियों ने गौ-अभ्यारण्य में सीखा गौपालन और पर्यावरण संरक्षण का व्यावहारिक ज्ञान
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