कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी लोकेश कुमार जांगिड़ ने किसानों से रबी और खरीफ फसलों की कटाई के बाद खेतों में नरवाई न जलाने की अपील की है
कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी लोकेश कुमार जांगिड़ ने जिले के किसानों से रबी और खरीफ फसलों की कटाई के बाद खेतों में नरवाई (फसल अवशेष) न जलाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। इसलिए, किसानों से आग्रह किया गया है कि वे नरवाई प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करें और पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनें। कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया है कि हार्वेस्टर संचालकों के लिए प्रत्येक हार्वेस्टर में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) लगाना अनिवार्य है। अक्टूबर में जारी किए गए आदेश के अनुसार, एसएमएस के बिना हार्वेस्टर से फसल की कटाई और संचालन प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन कर बिना एसएमएस के हार्वेस्टर संचालित करने वाले संबंधित मालिक के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में गुरुवार को कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र, मुरैना में हार्वेस्टर संचालकों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में संचालकों को कलेक्टर के निर्देशों से विस्तार से अवगत कराया गया। उन्हें एसएमएस की अनिवार्यता और नरवाई प्रबंधन के तरीकों के बारे में गहन जानकारी दी गई। कलेक्टर ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि फसल कटाई के बाद नरवाई जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नरवाई जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं, जिससे भूमि की पोषक क्षमता और जैविक संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा, इससे वायु प्रदूषण भी बढ़ता है और आसपास के क्षेत्रों में आग लगने का खतरा भी मंडराने लगता है रहती। कलेक्टर ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई प्रबंधन के लिए एसएमएस युक्त कंबाइन हार्वेस्टर, बेलर, रीपर, रीपर-कम-बाइंडर, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करें। इन यंत्रों के उपयोग से न केवल फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने हार्वेस्टर संचालकों और किसानों से शासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने और नरवाई न जलाने का आग्रह किया। कलेक्टर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, और इसके लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। बैठक में उप संचालक कृषि अनंत बिहारी सडैया, सहायक कृषि यंत्री अखिलेश सोलंकी, सहायक संचालक कृषि ओमवीर सिंह भदौरिया, उप यंत्री अनुशा अवस्थी सहित कृषि विभाग के अन्य अधिकारी और कई हार्वेस्टर संचालक उपस्थित रहे। इन सभी ने कलेक्टर के निर्देशों को ध्यानपूर्वक सुना और नरवाई प्रबंधन के महत्व को समझा। उन्होंने भविष्य में इन नियमों का पालन करने का आश्वासन दिया। यह पहल जिले में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नरवाई जलाने से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता कम होती है, बल्कि यह वायुमंडल में हानिकारक गैसों को भी छोड़ती है, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए, किसानों द्वारा आधुनिक तकनीकों को अपनाना न केवल उनके खेतों के लिए बल्कि पूरे समुदाय के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होगा। सरकार द्वारा इन आधुनिक यंत्रों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं भी चलाई जा रही हैं, ताकि किसान इन तकनीकों को आसानी से अपना सकें।

