एनजीटी ने एसडीएम कोलार, जल संसाधन विभाग और भोपाल नगर निगम को अगले 10 दिनों में झील का एफटीएल और बफर जोन सीमांकन पूरा करने का निर्देश दिया
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भोपाल की शाहपुरा झील के संरक्षण, सीमांकन और अतिक्रमण हटाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति श्योकुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने सुनवाई के दौरान विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालने और अदालत का समय बर्बाद करने की प्रवृत्ति पर कड़ा ऐतराज जताया है। पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया कि एसडीएम कोलार, जल संसाधन विभाग और भोपाल नगर निगम आपस में समन्वय बनाकर गठित समिति के साथ अगले 10 दिनों के भीतर शाहपुरा झील का वास्तविक एफटीएल (फुल टैंक लेवल) और बफर जोन का सीमांकन हर हाल में पूरा करें। याचिकाकर्ता पर्यावरणविद् नितिन सक्सेना की ओर से पक्ष रखते हुए अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने बताया कि शाहपुरा झील एक अधिसूचित वेटलैंड है, इसके बावजूद झील में लगातार बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी बहाया जा रहा है और बफर जोन में अतिक्रमण बने हुए हैं, जो कि वेटलैंड (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 का सीधा उल्लंघन है। सुनवाई के दौरान एसडीएम कोलार पीसी पांडे बिना पूरी जानकारी और तैयारी के उपस्थित हुए थे, जिस पर अधिकरण ने उनके प्रति गंभीर नाराजगी व्यक्त की। अदालत ने उन्हें भविष्य में पूरी तैयारी के साथ ही अदालती कार्यवाही में उपस्थित रहने के निर्देश दिए। NGT ने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे ही एफटीएल और बफर जोन का निर्धारण पूरा हो, शाहपुरा झील के कैचमेंट और 50 मीटर बफर एरिया में मौजूद सभी अवैध और अस्थायी निर्माणों को तत्काल प्रभाव से हटाने की कार्रवाई शुरू की जाए। अतिक्रमण पर तत्काल बुलड़ोजर चलाने का निर्देश दिया गया है। मामले में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल मास्टर प्लान (33 मीटर) और वेटलैंड्स रूल्स, 2017 (50 मीटर) के तहत एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के माध्यम से ड्रोन सर्वे कराया गया था। 24 जुलाई को हुए इस सर्वे में कैचमेंट एरिया में कई स्थायी व अस्थायी निर्माण और अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। इन अतिक्रमणों पर तत्काल बुलड़ोजर चलाने का निर्देश दिया गया है, जिससे झील के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाया जा सके। भोपाल नगर निगम द्वारा अब तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल न करने पर NGT ने नाराजगी जताई और अगली सुनवाई से पहले अनिवार्य रूप से अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। निगम को जवाब दाखिल करने की अंतिम चेतावनी दी गई है। यह आदेश मामले की गंभीरता और झील के संरक्षण की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है। NGT ने सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी और जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की। NGT ने स्पष्ट किया कि झील के संरक्षण के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा। एफटीएल और बफर जोन का निर्धारण जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए ताकि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रभावी ढंग से की जा सके। यदि निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि झील के आसपास के क्षेत्र को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जाए। अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता ने अदालत को बताया कि शाहपुरा झील एक अधिसूचित वेटलैंड है और इसके संरक्षण के लिए वेटलैंड (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत विशेष प्रावधान हैं। इन नियमों का उल्लंघन कर झील में लगातार बिना ट्रीट किया हुआ गंदा पानी बहाया जा रहा है और बफर जोन में अतिक्रमण बने हुए हैं। यह झील के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। ड्रोन सर्वे में झील के कैचमेंट एरिया में कई स्थायी व अस्थायी निर्माण और अतिक्रमण पाए गए हैं। इन अतिक्रमणों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए हैं। NGT ने स्पष्ट किया कि जैसे ही एफटीएल और बफर जोन का निर्धारण पूरा हो, इन अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की जाए। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि झील के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखा जाए। एसडीएम कोलार पीसी पांडे को सुनवाई के दौरान पूरी जानकारी और तैयारी के साथ उपस्थित न होने पर फटकार लगाई गई। NGT ने उन्हें भविष्य में अदालती कार्यवाही में पूरी तैयारी के साथ आने का निर्देश दिया। यह घटना सरकारी अधिकारियों द्वारा मामले की गंभीरता को समझने में बरती जा रही लापरवाही को उजागर करती है। NGT ने भोपाल नगर निगम को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अंतिम चेतावनी दी है। निगम को अगली सुनवाई से पहले अनिवार्य रूप से अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी होगी। यह आदेश दर्शाता है कि NGT इस मामले में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं करेगा और सभी विभागों को सक्रिय रूप से कार्य करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को निर्धारित है। इस सुनवाई में सभी संबंधित विभागों को की गई कार्रवाई की एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करनी होगी। NGT इस बात पर जोर देगा कि झील के संरक्षण और अतिक्रमण हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। शाहपुरा झील के संरक्षण के लिए गठित समिति में एसडीएम कोलार, जल संसाधन विभाग और भोपाल नगर निगम के प्रतिनिधि शामिल हैं। इस समिति को एफटीएल और बफर जोन का निर्धारण अगले 10 दिनों में पूरा करना है। यह समन्वय झील के प्रभावी प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण है। वेटलैंड (संरक्षण और प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत शाहपुरा झील के कैचमेंट एरिया और 50 मीटर बफर एरिया में सभी अवैध और अस्थायी निर्माणों को तत्काल हटाया जाना है। यह सुनिश्चित करेगा कि झील का प्राकृतिक स्वरूप बना रहे और उसे किसी भी प्रकार के नुकसान से बचाया जा सके। NGT ने सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी और एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की। पीठ ने कहा कि इस तरह का रवैया न केवल अदालत का समय बर्बाद करता है, बल्कि झील के संरक्षण के प्रयासों को भी बाधित करता है। सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। भोपाल नगर निगम को अगली सुनवाई से पहले अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है। यह रिपोर्ट झील के संरक्षण और अतिक्रमण हटाने की दिशा में की गई कार्रवाई का विवरण देगी। NGT इस मामले में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही को गंभीरता से लेगा।

