सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए दमोह में दो दिवसीय रैंप कार्यशाला का आयोजन, योजनाओं की दी गई जानकारी
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय रैंप (रैसिन्ग और अच्चेलेरतिन्ग एमएसएमई पेर्फ़ोर्मन्चे) कार्यशाला का शुभारंभ 13 अक्टूबर को मंगलम रेस्टोरेंट, दमोह में हुआ। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जिले के उद्यमियों, आकांक्षी युवाओं और स्वसहायता समूहों को उद्यमिता से संबंधित महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं की जानकारी देना, वित्तीय जागरूकता बढ़ाना, व्यवसाय को औपचारिक बनाना, गुणवत्ता सुधारना, बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा और सतत व्यवसाय संचालन के प्रति उन्हें जागरूक करना है। यह पहल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने और उनकी प्रदर्शन क्षमता को बढ़ाने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है। कार्यशाला के प्रथम दिवस पर, उपस्थित उद्यमियों और स्वसहायता समूहों को केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही विभिन्न उद्यमिता-केंद्रित योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि कैसे इन योजनाओं का लाभ उठाकर वे अपने व्यवसायों को सुचारू रूप से संचालित कर सकते हैं और निरंतर प्रगति की ओर बढ़ सकते हैं। इस सत्र में एमएसएमई प्रोत्साहन नीति और मध्य प्रदेश एमएसएमई भू-आवंटन नियमों पर भी प्रकाश डाला गया, जो व्यवसाय स्थापित करने और विस्तारित करने वाले उद्यमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के प्रबंधक अशोक शर्मा और नीलेश साहू ने अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही, न.आरएलएम जिला प्रबंधक अरविंद चंदेल, न.यूएलएम अरशद खान और रानी सेन ने भी शिरकत की। लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष सेवंत कुमार गुजराती, सचिव दिलेश कुमार चौधरी, व्यापारी संघ के अध्यक्ष जुगल किशोर अग्रवाल, एसबीआई बैंक के डिप्टी मैनेजर आकाश कुमार और नाबार्ड बैंक के डीडीएम राजन तोमरी जैसे गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित रहे, जो जिले में औद्योगिक विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को एमएसएमई प्रोमोतिओन पोलिच्य, आरएएमपी, ज़ेडईडी (ज़ेरो देफ़ेच्त ज़ेरो एफ़्फ़ेच्त), आईपीआर (इन्तेल्लेच्तुअल प्रोपेर्त्य रिघ्त्स), एसएचजी फ़ोर्मलिज़तिओन, फ़िनन्चिअल अवरेनेस्स, और ओएनडीसी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक मार्गदर्शन दिया। इन सत्रों के माध्यम से, प्रतिभागियों को अपने व्यवसाय को औपचारिक स्वरूप देने, प्रभावी वित्तीय प्रबंधन, उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा, स्थानीय उत्पादों की पहचान और ब्रांडिंग, तथा संसाधनों के कुशल उपयोग जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेषज्ञ सलाह मिली। कार्यशाला का यह प्रथम दिवस विशेष रूप से व्यवसाय के विभिन्न आयामों पर केंद्रित रहा, जहाँ विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों का सामना करने और समाधान खोजने के तरीके सिखाए। यह जानकारी उन्हें न केवल वर्तमान व्यवसाय को बेहतर बनाने में मदद करेगी, बल्कि भविष्य में नए उद्यम स्थापित करने के लिए भी प्रेरित करेगी। इस तरह की पहलें स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। द्वितीय दिवस की कार्यशाला में स्टार्टअप अवेयरनेस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें युवा उद्यमियों को नए व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया, बाजार की संभावनाएं और आवश्यक रणनीतियों के बारे में बताया जाएगा।

