गुरुवार रात कोलार इलाके में अमरनाथ रोड से जागरण लेक सिटी जाने वाले रास्ते पर एक बाघ दिखाई दिया, जिससे राजधानी में एक बार फिर लोगों को सतर्क कर दिया गया है। कोलार थाना पुलिस की 112 टीम ने बाघ को सड़क किनारे देखा और उसका 16 सेकंड का वीडियो भी बनाया। इस वीडियो में बाघ सड़क किनारे लगी जाली के पार बैठा नजर आ रहा है। बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होने के बाद वन विभाग ने इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। यह इलाका पहले से ही बाघों के विचरण क्षेत्र में शामिल है, जहां कलियासोत, केरवा और आसपास के जंगलों में बाघों की लगातार मौजूदगी दर्ज की जाती रही है। भोपाल के आसपास करीब 25 किलोमीटर के दायरे में बाघों का मूवमेंट बना हुआ है। कलियासोत और केरवा के जंगलों के अलावा कोलार और बैरसिया क्षेत्र में भी बाघ देखे जाते रहे हैं। फरवरी 2022 में चूना भट्टी चौराहे के पास भोज यूनिवर्सिटी परिसर में भी बाघ की मौजूदगी सामने आई थी। भोपाल के जंगलों में 13 रेसिडेंशियल बाघ मौजूद हैं, जो कलियासोत, केरवा, समरधा, अमोनी और भानपुर क्षेत्र में अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। इन बाघों का जन्म भी इसी इलाके में हुआ है और बाघिन टी-123 का कुनबा भी इसी क्षेत्र में सक्रिय है। शहर से लगे रातापानी के जंगल में भी बाघों की अच्छी मौजूदगी है। बाघ मित्र राशिद नूर के अनुसार, कलियासोत डैम, चंदनपुरा और केरवा सहित आसपास के जंगलों में कई बाघ रहते हैं और उनकी आवाजाही लगातार देखने को मिलती है। उनके अनुसार, भोपाल में मास्टर प्लान, भूमि उपयोग और शहरी विस्तार को लेकर चर्चा तेज होने पर बाघों की मौजूदगी शहर और जंगल के बीच की सीमा का अहसास कराती है। भोपाल की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि जंगल, जलस्रोत और रिहायशी इलाके एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। ऐसे में शहरी विकास के साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके गलियारों को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है। बाघों की लगातार मौजूदगी इस बात की याद दिलाती है कि भोपाल के विकास की योजना बनाते समय प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
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भोपाल में दिखा बाघ, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट
6 नवंबर 2026 को 11:09 pm बजे

भोपाल में दिखा बाघ, वन विभाग ने जारी किया अलर्ट
