संभावित सत्र 7 दिसंबर से शुरू होकर 5 दिन चलेगा, द्वितीय अनुपूरक बजट पेश होगा
मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र दिसंबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। यह सत्र 7 दिसंबर से बुलाया जा सकता है और यह 5 दिन का हो सकता है। इस दौरान सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का द्वितीय अनुपूरक बजट पेश करेगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी, जिसमें पंचायत राज अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव शामिल हो सकता है। नगरीय प्रशासन विभाग कॉलोनाइजर एक्ट में संशोधन से जुड़ा प्रस्ताव भी पेश कर सकता है। इन प्रस्तावों पर सदन में चर्चा और आगे की विधायी प्रक्रिया होने के आसार हैं। विधानसभा की कार्यवाही इस बार पूरी तरह से डिजिटल होने की उम्मीद है, जिसके तहत सदन की कार्यवाही और विधायी कार्य में डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, सत्र की अंतिम तारीख और अवधि को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि सत्र 7 दिसंबर से शुरू होकर 11 दिसंबर तक चल सकता है। यह पांच दिवसीय सत्र होगा, जिसमें अनुपूरक बजट के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा की जाएगी। शीतकालीन सत्र में पंचायत राज अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव लाए जाने की संभावना है। इस संशोधन के माध्यम से पंचायती राज व्यवस्था को और मजबूत बनाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके अलावा, नगरीय प्रशासन विभाग कॉलोनाइजर एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव ला सकता है। इस संशोधन का उद्देश्य शहरी विकास को गति देना और आवंटियों के हितों की रक्षा करना है। सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट सत्र में पेश करेगी। इस बजट में विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय मांगों को शामिल किया जाएगा। अनुपूरक बजट से सरकार को चालू वित्तीय वर्ष के दौरान अप्रत्याशित खर्चों को पूरा करने और नई विकास योजनाओं को शुरू करने में मदद मिलेगी। अनुपूरक बजट के अलावा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी। इनमें पंचायत राज अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन शामिल हैं, जिनका उद्देश्य ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना और स्थानीय निकायों को सशक्त बनाना है। इस प्रस्तावित संशोधन का मुख्य उद्देश्य शहरी कॉलोनियों के विकास को विनियमित करना और भू-माफियाओं पर अंकुश लगाना है। यह संशोधन आवंटियों के हितों की रक्षा करने और रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाने में भी सहायक होगा। इन विधायी प्रस्तावों पर सदन में विस्तार से चर्चा की जाएगी और यदि वे पारित हो जाते हैं, तो प्रदेश में शहरी और ग्रामीण विकास की राहें और सुगम हो जाएंगी। यह शीतकालीन सत्र पूरी तरह से डिजिटल होने की उम्मीद है। विधानसभा सचिवालय ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। सत्र के दौरान डिजिटल सिस्टम का उपयोग किया जाएगा, जिससे कार्यवाही में तेजी आएगी और कागजी कार्रवाई कम होगी। विधायकों को भी डिजिटल उपकरणों के इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है। यह कदम विधानसभा को आधुनिक बनाने और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। हालांकि, सत्र की अंतिम तारीख और अवधि को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पंचायत राज अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव लाए जाने की प्रबल संभावना है। इस संशोधन का उद्देश्य ग्रामीण स्थानीय निकायों को अधिक अधिकार और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान करना हो सकता है। इससे जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी और जनता की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में जुटा है। इस संशोधन के माध्यम से शहरी विकास को और अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जाएगा। आवंटियों के हितों की सुरक्षा और रियल एस्टेट कारोबार में जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा। इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सदन में चर्चा होने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को नई दिशा मिलेगी।
