यह आधुनिक सुविधा ट्रैक मरम्मत टीमों के लिए दूरदराज के इलाकों में आवास की समस्या को दूर करेगी
भोपाल में रेलवे 4 करोड़ 25 लाख 18 हजार 242 रुपये से अधिक खर्च कर 23 पुराने रेल कोचों को कैंपिंग कोच में बदलने जा रहा है। यह कदम रेलवे ट्रैक की मरम्मत और रखरखाव करने वाली टीमों के लिए किया जा रहा है। ये कैंपिंग कोच कर्मचारियों के लिए चलते-फिरते घरों की तरह काम करेंगे, जिनमें ट्रैक मशीनों पर काम करने वाले कर्मचारियों को रहने और आराम करने की सुविधा मिलेगी। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में कई घंटे या दिन तक काम करने वाली टीमों को ठहरने के लिए अलग से व्यवस्था नहीं करनी पड़ेगी। यह महत्वपूर्ण काम भोपाल स्थित पश्चिम मध्य रेलवे की कोच रिहैबिलिटेशन वर्कशॉप (सीआरडब्ल्यूएस) में संपन्न होगा। योजना को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहले हिस्से में 19 कोचों को बदला जाएगा, जिस पर 3 करोड़ 53 लाख 45 हजार 240 रुपये खर्च होंगे। दूसरे हिस्से में चार कोचों को तैयार किया जाएगा, जिस पर 71 लाख 73 हजार रुपये का अनुमानित व्यय आएगा। पूरे प्रोजेक्ट को 12 महीने की अवधि में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कैंपिंग कोच मुख्य रूप से ट्रैक मशीनों पर काम करने वाले कर्मचारियों और रेलवे ट्रैक का रखरखाव करने वाली टीमों के लिए उपयोग किए जाते हैं। इन कोचों को सीधे काम वाली जगह के पास पहुंचाया जा सकता है, जिससे कर्मचारी वहीं रहकर आराम कर सकें। इससे दूरदराज के इलाकों में ठहरने की चिंता समाप्त हो जाएगी और पटरियों की मरम्मत व देखरेख का कार्य सुचारू रूप से हो सकेगा। कैंपिंग कोच से कर्मचारियों को कार्यस्थल के पास ही ठहरने और आराम करने की सुविधा मिलने से उनके आने-जाने का समय बचेगा। यह व्यवस्था कई दिनों तक चलने वाले मरम्मत कार्यों की योजना बनाने में भी सहायक सिद्ध होगी। आवश्यकतानुसार, इन कोचों को दूसरी जगहों पर भेजकर ट्रैक रखरखाव का काम और भी व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। रेलवे ने कुल 23 कैंपिंग कोच तैयार करने के काम को दो चरणों में विभाजित किया है। पहले चरण में 19 कोचों को बदला जाएगा, जिस पर 3.53 करोड़ रुपये का निवेश होगा। वहीं, दूसरे चरण में चार कोच तैयार किए जाएंगे, जिनकी अनुमानित लागत 71.73 लाख रुपये बताई गई है। दोनों चरणों को मिलाकर, इस पूरी परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 4.25 करोड़ रुपये है।
