न्यायाधिकरण ने 50 अवैध इकाइयों पर कार्रवाई का विवरण मांगा
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने भोपाल नगर निगम (बीएमसी) को अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग इकाइयों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण, एकल-उपयोग प्लास्टिक प्रतिबंध को लागू करने और ई-कचरा निपटान के संबंध में जानकारी प्रदान करने में विफल रहने पर कड़ी फटकार लगाई है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान, न्यायाधिकरण ने कहा कि निगम की अनुपालन रिपोर्ट याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करती है और उसे विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। यह सुनवाई न्यायाधिकरण द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज किए गए मामले (ओए नंबर 189/2025) और अनिल कुमार वर्मा द्वारा दायर एक याचिका (ओए नंबर 37/2026) से संबंधित थी, जिनकी एक साथ सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने 9 सितंबर, 2026 को बीएमसी की अनुपालन रिपोर्ट की जांच की और इसकी पर्याप्तता पर सवाल उठाए। न्यायाधिकरण ने भोपाल में संचालित 50 अवैध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग इकाइयों के खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण मांगा। साथ ही, नागरिक निकाय से एकल-उपयोग प्लास्टिक पर प्रतिबंध को लागू करने और ई-कचरे के उचित निपटान को सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों पर रिपोर्ट करने को कहा। पीठ ने अवलोकन किया कि रिपोर्ट में प्लास्टिक प्रतिबंध के प्रवर्तन पर पर्याप्त विवरण का अभाव था। एनजीटी ने प्लास्टिक कचरे से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर प्रकाश डाला, जिसमें कहा गया है कि फेंका गया प्लास्टिक पर्यावरण में बना रहता है और छोटे कणों में टूट जाता है जो मिट्टी और जल स्रोतों को प्रभावित कर सकते हैं। लैंडफिल में प्लास्टिक कचरे से निकलने वाले रसायन भूजल में रिस सकते हैं, जबकि सतही अपवाह प्रदूषकों को नदियों और झीलों तक ले जा सकता है। राज्य सरकार के एक वकील ने न्यायाधिकरण को बताया कि संबंधित विभागों से जानकारी एकत्र की जा रही है।

