गंभीर एनीमिया से पीड़ित हाई-रिस्क गर्भवती महिला का स्वास्थ्य विभाग, आशा कार्यकर्ता और एएनएम के समन्वित प्रयासों से सुरक्षित प्रसव कराया गया। महिला का हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 7 ग्राम था, जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति को दर्शाता है। पूर्व में सीजेरियन प्रसव हो चुका होने के कारण इस गर्भावस्था को उच्च जोखिम की श्रेणी में रखा गया था, लेकिन समय पर की गई स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और प्रभावी उपचार के कारण माता और नवजात शिशु दोनों सुरक्षित हैं। यह सफलता जिले में शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन का प्रमाण है। यह मामला वार्ड क्रमांक 1, गौरीशंकर, बूढ़ी बालाघाट निवासी दीक्षा चौरे का है, जिनका पंजीयन 16 अप्रैल 2026 को एएनएम श्रिता जैसवाल द्वारा किया गया था। आशा कार्यकर्ता कमला डोंगरे के निरंतर संपर्क और अथक प्रयासों से महिला की समय पर जांच सुनिश्चित की गई। मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक, ढीमरटोला में डॉ. प्रिया भोरोपे और डॉ. लक्ष्य वर्मा द्वारा की गई जांच में महिला गंभीर एनीमिया से पीड़ित पाई गईं। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, आशा कार्यकर्ता ने तत्काल एपीएम संजय मानेश्वर को सूचित किया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, जिला चिकित्सालय बालाघाट से समन्वय स्थापित कर महिला के लिए दो यूनिट ए पॉजिटिव रक्त की व्यवस्था की गई। पीएमएसए/ईपीएमएसए योजना के अंतर्गत महिला को निःशुल्क सोनोग्राफी और अन्य आवश्यक जांचों की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिससे उसके स्वास्थ्य की गहन निगरानी संभव हो सकी। पूर्व में सीजेरियन प्रसव और गंभीर एनीमिया के कारण संभावित जोखिम को ध्यान में रखते हुए, आशा कार्यकर्ता कमला डोंगरे ने विशेष सतर्कता बरती। आशा कार्यकर्ता ने 17 अक्टूबर को प्रसव की संभावित तिथि से पहले ही महिला को जिला चिकित्सालय बालाघाट में भर्ती करा दिया। यहां चिकित्सकों की कड़ी निगरानी में महिला को आवश्यक उपचार और देखभाल प्रदान की गई। समय पर अस्पताल में भर्ती होना, रक्त की समुचित व्यवस्था, आवश्यक रक्ताधान और विशेषज्ञ चिकित्सकीय देखभाल के परिणामस्वरूप 19 अक्टूबर 2026 को रात्रि 9.30 बजे महिला का सुरक्षित प्रसव संपन्न हुआ। इस सफल प्रसव के उपरांत, माता और नवजात शिशु दोनों स्वस्थ और सुरक्षित हैं। परिवार को इस दौरान सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क प्रदान की गईं, जो स्वास्थ्य विभाग की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। यह पूरी प्रक्रिया मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न सिंह दाहिया और अर्बन नोडल अधिकारी डॉ. पंकज महाजन के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुई। यह प्रकरण गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर पंजीयन के महत्व को रेखांकित करता है। नियमित स्वास्थ्य जांच, विशेष रूप से गंभीर एनीमिया जैसी स्थितियों की शीघ्र पहचान, हाई-रिस्क गर्भावस्था में विशेष निगरानी और समय पर अस्पताल में भर्ती कराना, सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम, आशा कार्यकर्ता और एएनएम के बीच उत्कृष्ट समन्वय इस सफलता का मुख्य आधार रहा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे नियमित रूप से अपनी स्वास्थ्य जांच कराएं और चिकित्सकों द्वारा दिए गए सभी चिकित्सकीय परामर्शों का निष्ठापूर्वक पालन करें।
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हाई-रिस्क गर्भवती का सुरक्षित प्रसव, गंभीर एनीमिया पर स्वास्थ्य विभाग की जीत
27 अक्टूबर 2026 को 11:51 pm बजे

हाई-रिस्क गर्भवती का सुरक्षित प्रसव, गंभीर एनीमिया पर स्वास्थ्य विभाग की जीत
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