दिवाली से ठीक पहले, भोपाल में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाइयों की शुद्धता को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। चुनाभट्टी इलाके में स्थित बीकानेर मिष्ठान भंडार पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की टीम ने छापा मारा। इस दौरान काजू कतली और अन्य मिठाइयों पर लगे चमकीले वर्क की गुणवत्ता पर संदेह जताया गया, क्योंकि यह आशंका थी कि चांदी के वर्क की जगह एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल किया जा रहा हो। इस मामले में नमूनों की प्रयोगशाला जांच के बाद ही असली स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए उन पर चांदी का वर्क लगाया जाता है। यदि चांदी के नाम पर किसी दूसरी धातु की फॉयल का इस्तेमाल होता है, तो यह न केवल खाद्य सुरक्षा का उल्लंघन है, बल्कि उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी भी है। बीकानेर मिष्ठान भंडार में मिठाइयों पर लगे वर्क की गुणवत्ता को लेकर यही संदेह सामने आया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि मिठाइयों पर वास्तव में किस धातु का वर्क इस्तेमाल किया गया है। फिलहाल, एल्युमिनियम के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं हुई है। असली चांदी का खाद्य वर्क एफएसएसएआई के नियमों के अनुसार, कम से कम 999/1000 शुद्धता वाला होना चाहिए। एल्युमिनियम फॉयल दूसरी धातु से बनती है। दोनों दिखने में चमकीली हो सकती हैं, इसलिए केवल रंग या चमक के आधार पर इनकी पहचान करना मुश्किल है। हाथ से रगड़ने या छूकर देखने जैसे घरेलू तरीके भी निर्णायक नहीं होते। वर्क की वास्तविक धातु और शुद्धता का पता केवल प्रयोगशाला जांच से ही लगाया जा सकता है। खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाली धातु की सुरक्षा उसकी गुणवत्ता, मात्रा और उसमें मौजूद अशुद्धियों पर निर्भर करती है। यदि किसी फॉयल में हानिकारक धातुओं की मिलावट है या इसका इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा मानकों के विपरीत किया जा रहा है, तो यह स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकता है। कुछ धातुओं के अधिक या लंबे समय तक संपर्क में रहने से गुर्दे, तंत्रिका तंत्र और अन्य अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, केवल एल्युमिनियम होने की आशंका से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मिठाई खाने से निश्चित रूप से बीमारी होगी। इसके लिए धातु की सही पहचान, उसकी मात्रा और नमूने की विस्तृत जांच आवश्यक है। विभाग इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है ताकि उपभोक्ताओं को किसी भी तरह के धोखे या स्वास्थ्य जोखिम से बचाया जा सके। इस मामले में जांच का एक अहम पहलू वर्क की आपूर्ति का स्रोत भी है। यदि मिठाई में मानकों के विपरीत धातु के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि वर्क कहां तैयार की गई, इसे किस सप्लायर से खरीदा गया और बाजार में इसकी आपूर्ति कैसे हुई। जांच के दौरान खरीद बिल, सप्लायर के रिकॉर्ड और वर्क की पैकेजिंग की पड़ताल की जा सकती है।
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भोपाल में मिठाई की दुकान पर छापा
27 अक्टूबर 2026 को 11:51 pm बजे
