खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को आधुनिक व प्राकृतिक खेती, फसल अवशेष प्रबंधन और रबी में गेहूं, चना, सरसों, अलसी की खेती की जानकारी दी गई
कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से 24 अक्टूबर को वारासिवनी विकासखंड के ग्राम सिकन्द्रा और कोस्ते में 'खेत बचाओ अभियान' के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में किसानों को पराली न जलाने, प्राकृतिक खेती अपनाने, धान की सीधी बुवाई करने और मिट्टी परीक्षण कार्ड के आधार पर संतुलित उर्वरकों का उपयोग करने के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। यह अभियान किसानों को आधुनिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित करने के लिए चलाया गया था। कार्यक्रम के दौरान, किसानों को फसल अवशेषों को खेतों में जलाने के बजाय उनके उचित प्रबंधन के तरीके बताए गए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद उपयोगी सूक्ष्मजीवों को गंभीर नुकसान पहुँचता है और साथ ही वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। किसानों को फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए उपलब्ध आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के बारे में भी अवगत कराया गया, जिससे वे पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे सकें। किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। उन्हें बताया गया कि रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम होती है और स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। इसके विपरीत, प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी को उपजाऊ बनाए रखती है, बल्कि लागत भी कम करती है और पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। सीधी बुवाई की तकनीक और मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग से फसल की गुणवत्ता और उपज दोनों में सुधार होता है। कृषि अधिकारियों ने किसानों को रबी की फसलों के लिए स्टेप सीडर और सुपर सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इन यंत्रों की सहायता से फसल अवशेषों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया जा सकता है और बुवाई का कार्य भी सुचारू रूप से संपन्न होता है। यह तकनीक किसानों को समय और श्रम दोनों की बचत करने में मदद करती है, जिससे वे बेहतर उत्पादन की ओर अग्रसर हो सकते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने किसानों को रबी मौसम में धान की खेती के स्थान पर गेहूं, चना, सरसों और अलसी जैसी फसलों को लगाने की सलाह दी। उन्होंने फसल विविधीकरण के फायदों को रेखांकित किया, जिसमें मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, कीटों और बीमारियों का कम प्रकोप, तथा बाजार में विभिन्न फसलों की उपलब्धता के कारण आय में वृद्धि शामिल है। यह सलाह किसानों को जोखिम कम करने और आय के स्रोतों को बढ़ाने में मदद करेगी। किसानों को फसल विविधीकरण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के माध्यम से खेती को अधिक टिकाऊ बनाने के महत्व पर जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि टिकाऊ खेती न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए लाभकारी है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी मिट्टी और पर्यावरण को सुरक्षित रखती है। यह दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कृषि विभाग ने किसानों से खेत की मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण के लिए विभाग द्वारा दी गई सलाह के अनुसार खेती करने का आग्रह किया। मिट्टी परीक्षण के नियमित अंतराल पर कराने और उसके आधार पर ही खाद व उर्वरकों का प्रयोग करने की बात कही गई। इससे मिट्टी की सेहत बनी रहेगी और फसल की उपज भी बेहतर होगी।

