दमोह के बेलाताल टापू पर शिव साईं धाम में पितृपक्ष के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के छठवें दिन कथावाचक पंडित कमलेश्वरानंद जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान की माखन चुराने की लीला भक्तों और ईश्वर के बीच प्रेम और आत्मीयता का प्रतीक है। यह लीला केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि प्रेम से परिपूर्ण थी, जिसमें श्रीकृष्ण अपनी बाल सखाओं के साथ माखन बांटते थे। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। महाराज जी ने कालिया मर्दन प्रसंग सुनाते हुए कहा कि यमुना नदी में कालिया नाग के विष के कारण जल दूषित हो गया था और आसपास का वातावरण भी प्रभावित हो रहा था। भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना में प्रवेश कर कालिया नाग का मर्दन किया और उसके अहंकार को समाप्त किया। इस स्पर्श मात्र से कालिया नाग का उद्धार हुआ और उसने भगवान की शरण स्वीकार की। यह प्रसंग भक्तों को यह संदेश देता है कि पूर्ण विश्वास और श्रद्धा से ईश्वर की शरण में जाने पर वे अवश्य सुनते हैं। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के मथुरा पहुंचने का प्रसंग भी सुनाया गया। वहां उन्होंने अत्याचार और अधर्म के प्रतीकों का सामना किया। कथावाचक ने धनुष यज्ञ के प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया कि जब-जब समाज में अधर्म और अन्याय बढ़ता है, तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर का अवतार होता है। यह अवतार समाज में न्याय और धर्म की पुनर्स्थापना के लिए होता है। कथा के एक अन्य महत्वपूर्ण प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के विवाह का वर्णन किया गया। महाराज जी ने बताया कि रुक्मणी भगवान श्रीकृष्ण को अपने आराध्य और पति के रूप में स्वीकार कर चुकी थीं। जब उनके विवाह की तैयारी अन्यत्र की जा रही थी, तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर अपनी मनोकामना व्यक्त की। भगवान श्रीकृष्ण रुक्मणी की पुकार सुनकर उन्हें लेने पहुंचे और उनका हरण कर विवाह किया। यह विवाह प्रेम और ईश्वर की भक्त के प्रति निष्ठा का प्रतीक था।
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पितृपक्ष पर दमोह में भागवत कथा: पंडित कमलेश्वरानंद जी ने सुनाईं श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं और रुक्मणी विवाह
5 अक्टूबर 2026 को 11:26 pm बजे

पितृपक्ष पर दमोह में भागवत कथा: पंडित कमलेश्वरानंद जी ने सुनाईं श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं और रुक्मणी विवाह
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