सात प्रमुख क्षेत्रों में 46 प्रदर्शन संकेतकों से विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन होगा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थी हितों पर विशेष जोर दिया जाएगा
उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार ने विश्वविद्यालयों में रिक्त शैक्षणिक पदों पर भर्ती शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत आवंटित राशि का निर्धारित समय-सीमा में उपयोग सुनिश्चित करने को कहा। परमार ने डिजिटल मूल्यांकन की कार्ययोजना पर प्राथमिकता से क्रियान्वयन करने पर जोर दिया। स्वीकृत विकास योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगा। मंगलवार को मंत्रालय में उच्च शिक्षा विभाग और प्रदेश के 17 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के बीच डिलीवरी पार्टनरशिप एग्रीमेंट (DPA) पर हस्ताक्षर हुए। इस पहल से विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक, प्रशासनिक, वित्तीय और संस्थागत प्रगति का आंकलन निर्धारित लक्ष्यों और उपलब्धियों के आधार पर होगा। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। विश्वविद्यालयों के प्रदर्शन का मूल्यांकन सात प्रमुख क्षेत्रों में निर्धारित 46 प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (क्पिस) के आधार पर किया जाएगा। वर्ष 2026-27, 2027-28 और 2028-29 के लक्ष्यों की प्राप्ति का आकलन आधार वर्ष के सापेक्ष होगा, जिससे प्रगति का निष्पक्ष मूल्यांकन संभव होगा।

