मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में आने वाले समय में सड़क किनारे पार्किंग और जाम की दिक्कत बढ़ने वाली है। नगर तथा ग्राम निवेश (टीएंडसीपी) भवन निर्माण में ग्राउंड कवरेज के नियम को ही खत्म करने जा रहा है। इसका सीधा असर यह होगा कि जितना बड़ा प्लॉट है, लगभग उतना ही पूरा निर्माण हो जाएगा। इससे जमीन पर गाड़ी पार्क करने की जगह नहीं बचेगी। अभी तक 30 से 60 फीसदी तक ग्राउंड पर निर्माण का नियम है। बाकी एफएआर के अनुसार ऊपरी मंजिल पर निर्माण किया जा सकता है। मौजूदा नियम में जमीन का 40 से 60 फीसदी हिस्सा पार्किंग व अन्य उपयोग के लिए बच जाता है। मुख्य मार्ग या सर्विस रोड पर पार्किंग व अन्य उपयोग का दबाव प्लॉट का ये खुला हिस्सा समेट लेता है। अब यदि इस पर भी निर्माण हुआ तो पूरा भार सड़कों पर आएगा। इस बदलाव से व्यावसायिक क्षेत्रों में आने वाले ग्राहकों और कर्मचारियों के वाहनों को खड़ा करने की समस्या गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भवनों के भीतर पार्किंग की जगह कम हुई तो सड़क किनारे वाहन खड़े करने की मजबूरी बढ़ेगी। इससे ट्रैफिक की रफ्तार प्रभावित होगी और पहले से व्यस्त मार्गों पर जाम की स्थिति बन सकती है। प्लॉट के आकार के अनुसार ग्राउंड कवरेज तय है। 48 से 75 वर्गमीटर तक के प्लॉट पर 60 फीसदी, 105 से 200 वर्गमीटर तक 50 फीसदी, 200 वर्गमीटर तक 41 फीसदी, 216 वर्गमीटर पर 42 फीसदी, 288 वर्गमीटर पर 40 फीसदी, 360 वर्गमीटर पर 35 फीसदी, 405 से 600 वर्गमीटर पर 33 फीसदी और 750 वर्गमीटर पर 30 फीसदी ग्राउंड कवरेज की अनुमति है। संयुक्त संचालक टीएंडसीपी नीरज आनंद ने बताया कि नियमों पर आमजन के सुझाव लिए जा रहे हैं। यह प्रक्रिया में है और सुनवाई के बाद निर्णय होगा। यह केवल भूतल पर बनी इमारत के क्षेत्रफल को दर्शाता है।
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भोपाल में 'ग्राउंड कवरेज' नियम खत्म होने से सड़क किनारे पार्किंग और जाम की दिक्कतें बढ़ेंगी
13 अक्टूबर 2026 को 11:47 pm बजे
