मध्य प्रदेश आज अपना 71वां स्थापना दिवस मना रहा है, जो केवल एक राज्य के गठन की वर्षगांठ का उत्सव नहीं, बल्कि सात दशकों से अधिक की विकास यात्रा, उपलब्धियों, संघर्षों और भविष्य की संभावनाओं का मूल्यांकन करने का भी अवसर है। कभी प्राकृतिक संसाधनों, सांस्कृतिक विविधता और अपार संभावनाओं के लिए पहचाना जाने वाला यह प्रदेश आज विकास के नए प्रतिमान गढ़ने की आकांक्षा के साथ आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में प्रदेश के प्रत्येक नागरिक, किसान, श्रमिक, उद्यमी, युवा, महिला, जनप्रतिनिधि और कर्मचारी की भूमिका उल्लेखनीय रही है। अलग-अलग समय पर बनी नीतियों, जनभागीदारी और सामूहिक प्रयासों ने प्रदेश की प्रगति की नींव रखी है। वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस विकास यात्रा को एक नई वैचारिक दिशा देने का प्रयास दिखाई देता है। उनका ‘विरासत से विकास’ का विचार मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा को आधुनिक विकास की शक्ति में बदलने की अवधारणा प्रस्तुत करता है। ‘विरासत से विकास’ की अवधारणा का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि विकास की धारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। जनजातीय समाज की परंपराएं, स्थानीय कला-कौशल, लोकसंस्कृति और पारंपरिक ज्ञान प्रदेश की अमूल्य पूंजी हैं। इनका संरक्षण करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना समावेशी विकास की अनिवार्य शर्त है। विरासत तभी जीवंत रहती है, जब उसके संरक्षक समुदाय सम्मान, अवसर और आर्थिक सुरक्षा के साथ आगे बढ़ते हैं। मध्य प्रदेश की विकास यात्रा में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का स्थान केंद्रीय रहा है। प्रदेश की बड़ी आबादी की आजीविका खेती, पशुपालन और उससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है। इसलिए किसानों की आय बढ़ाना, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देना विकास की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। खेती को बाजार, तकनीक और मूल्य संवर्धन से जोड़ने पर गांवों में ही रोजगार के नए अवसर तैयार हो सकते हैं। कृषि के साथ उद्योग और सेवा क्षेत्र का संतुलित विकास मध्य प्रदेश को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बना सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन में मध्य प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की आकांक्षा महत्वपूर्ण है। प्रदेश को नंबर वन बनाने का लक्ष्य तभी सार्थक होगा, जब यह केवल एक नारा न रहकर ठोस उपलब्धियों में दिखाई दे। एक नवंबर 2026 का स्थापना दिवस इसी सामूहिक संकल्प को मजबूत करने का अवसर है।
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विरासत से विकास : प्रदेश के स्वर्णिम भविष्य का संकल्प
31 अक्टूबर 2026 को 10:51 pm बजे
