मध्य प्रदेश के दमोह जिले में जबलपुर रोड पर स्थित रॉयल दमयंती पैलेस में निरंतर चौथी बार ओशो फेस्टिवल का आयोजन होने जा रहा है। यह बहुप्रतीक्षित आध्यात्मिक समागम 27 अक्टूबर से शुरू होकर 27 अक्टूबर तक चलेगा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य उत्सव, ध्यान, आनंद और समागम के माध्यम से लोगों को स्वयं से जुड़ने का अवसर प्रदान करना है। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक शांति चाहने वालों के लिए एक मंच प्रदान करेगा, बल्कि यह देशभर से ओशो प्रेमियों और सन्यासियों को एक साथ लाने का भी एक अनूठा अवसर होगा। फेस्टिवल की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और आयोजक इस बार के आयोजन को और भी यादगार बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। फेस्टिवल का शुभारंभ 24 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे एक विशेष कार्यक्रम के साथ होगा। इस अवसर पर नए सन्यासियों को ओशो की शिक्षाओं के अनुसार सन्यास की दीक्षा भी दिलाई जाएगी। यह दीक्षा समारोह उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा जो ओशो के मार्ग पर चलकर आत्म-ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ना चाहते हैं। दीक्षा प्राप्त करने वाले सन्यासियों को आध्यात्मिक यात्रा में मार्गदर्शन और समर्थन प्रदान किया जाएगा, जिससे वे अपने जीवन में ओशो के सिद्धांतों को आत्मसात कर सकें। इसके बाद चार दिनों तक विभिन्न प्रकार के ध्यान सत्र, आध्यात्मिक गतिविधियां, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन सत्रों में प्रतिभागियों को ध्यान की विभिन्न विधियों से परिचित कराया जाएगा, जिससे वे अपने मन को शांत कर सकें और आंतरिक शांति का अनुभव कर सकें। प्रेम, आनंद और जीवन जीने की कला जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा, जो प्रतिभागियों को अपने जीवन को अधिक अर्थपूर्ण और संतोषजनक बनाने में मदद करेगा। फेस्टिवल में देश के विभिन्न हिस्सों से ओशो सन्यासी अपनी साधना और अनुभवों को साझा करने के लिए जुटेंगे। इनमें उत्तराखंड के रुड़की से ओशो सन्यासी सागर स्वामी, मुंबई की टेरो कार्ड रीडर आरती राजदान, पश्चिम बंगाल के ओशो सन्यासी अक्षय विवेक, साउंड हीलिंग मेडिटेशन से जुड़े स्वामी आनंद बोधि और पुणे से मां अग्नि साक्षी जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। ये सभी अपने ज्ञान और अनुभवों से प्रतिभागियों को प्रेरित करेंगे। इन आध्यात्मिक गुरुओं के अलावा, विख्यात सूफी-गजल गायक मनीष शुक्ला और भजन व गजल गायक नितिन प्रदीप अग्रवाल बंधु अपनी मधुर प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। संगीत और आध्यात्मिक गतिविधियों का यह संगम प्रतिभागियों को एक अनूठे उत्सव के माहौल में ले जाएगा, जहाँ वे न केवल ध्यान और आत्म-चिंतन में लीन होंगे, बल्कि सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आनंद लेंगे। यह संयोजन उत्सव को और अधिक जीवंत और आनंददायक बनाएगा। फेस्टिवल का उद्देश्य केवल आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि प्रतिभागियों को एक ऐसे उत्सव के माहौल में जोड़ना भी है जहाँ वे स्वयं को और दूसरों को अधिक गहराई से समझ सकें। संगीत और ध्यान के माध्यम से एक सामंजस्यपूर्ण वातावरण तैयार किया जाएगा, जो सभी के लिए एक सुखद और परिवर्तनकारी अनुभव साबित होगा। बड़ी संख्या में युवाओं के शिविर में शामिल होने की उम्मीद है, जो ओशो की शिक्षाओं में रुचि रखते हैं और आत्म-विकास के मार्ग पर चलना चाहते हैं।
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दमोह में चौथी बार ओशो फेस्टिवल: सन्यासी जुटेंगे, नए साधकों को मिलेगी दीक्षा
5 अक्टूबर 2026 को 11:26 pm बजे

दमोह में चौथी बार ओशो फेस्टिवल: सन्यासी जुटेंगे, नए साधकों को मिलेगी दीक्षा
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