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महाकाल की नगरी उज्जैन से प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या तक 'सनातन स्वाभिमान पदयात्रा' का संकल्प अब साकार होने जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इस यात्रा पर निकलेंगे। इस यात्रा का लक्ष्य आस्था के साथ-साथ सत्य, सेवा, करुणा, समरसता और हर व्यक्ति के सम्मान की भावना को तलाशना है। यह सिर्फ किलोमीटर की दूरी तय करने वाली पदयात्रा नहीं, बल्कि सनातन की उस आत्मा की खोज है जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। यात्रा प्रभारी सचिन वत्स ने यात्रा के रूट की विस्तृत जानकारी साझा की है। यह पदयात्रा उज्जैन से शुरू होकर तराना, शाजापुर, सारंगपुर, खुजनेर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर, चंदेरी जैसे कई पड़ावों से गुजरेगी। इसके बाद यह तालबेहट, जेरोन, रामराजा के ओरछा जिला निवाड़ी होते हुए चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी से होकर गुजरेगी। इस पूरी यात्रा के दौरान कुल ⟦⟧ किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। यह यात्रा केवल एक भौतिक दूरी तय करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सनातन की पहचान को लेकर उठाए जा रहे सवालों के जवाब तलाशने का एक मंच भी बनेगी। यह सवाल उठाया जाएगा कि क्या सनातन की पहचान केवल नारों तक सीमित है, या यह समाज के हर व्यक्ति के सम्मान, समानता और न्याय में भी परिलक्षित होती है। इस यात्रा के माध्यम से सनातन के सामाजिक और मानवीय पक्ष को भी सामने लाने का प्रयास किया जाएगा, खासकर तब जब देश में धर्म और राजनीति को लेकर लगातार बहस जारी है। यात्रा के दौरान रास्ते में पड़ने वाले गांवों और कस्बों के आम लोगों से संवाद स्थापित किया जाएगा। जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों पर गहन चर्चा होगी और सनातन के मूल मूल्यों को लेकर एक स्पष्ट संदेश दिया जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की यह पदयात्रा ऐसे समय में हो रही है जब देश में धर्म, आस्था और राजनीति के बीच की रेखाएं लगातार धुंधली हो रही हैं। ऐसे में, 'सनातन स्वाभिमान' के माध्यम से यह यात्रा एक महत्वपूर्ण संवाद स्थापित करेगी। यह यात्रा सनातन धर्म के उन मूल सिद्धांतों को रेखांकित करेगी जो प्रेम, करुणा, समानता और सेवा पर आधारित हैं। यह देश में चल रही बहसों के बीच एक संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का प्रयास करेगी। यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव ओरछा जिला निवाड़ी होगा, जहां रामराजा के दर्शन किए जाएंगे। इसके पश्चात यात्रा चिरगांव, उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी से होते हुए अपने अंतिम गंतव्य अयोध्या पहुंचेगी। यह मार्ग विभिन्न ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों से होकर गुजरता है, जो यात्रा को एक व्यापक परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हैं। प्रत्येक पड़ाव पर स्थानीय लोगों के साथ संवाद और उनकी समस्याओं को सुनना यात्रा का अभिन्न अंग होगा। यात्रा का समापन अयोध्या में रामलला के दर्शन के साथ होगा, जो इस पूरे संकल्प का अंतिम लक्ष्य है। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक वैचारिक यात्रा है जो सनातन के सच्चे अर्थों को समाज में प्रसारित करने का प्रयास करेगी। यात्रा के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि सनातन सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन शैली है जो समरसता, सेवा और सम्मान पर आधारित है।
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