फिल्म 'बिन्नू की बारात' के टीज़र का विमोचन, बुंदेली कलाकारों का सम्मान
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को रविन्द्र भवन में तीन दिवसीय बुंदेली समागम का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया, जो 6 अक्टूबर तक चलेगा और बुंदेली संस्कृति व भाषा के संरक्षण पर केंद्रित है
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविंद्र भवन में तीन दिवसीय बुंदेली समागम का दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि बुंदेली बोली में माधुर्य और अपनत्व की मिठास है, जो इसे आजकल बहुत लोकप्रिय बना रही है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत युवाओं का देश है और हम उन्हें साथ लेकर ही विकसित भारत और विकसित मध्य प्रदेश के लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। यह समागम 6 अक्टूबर तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की संस्कृति, साहित्य और लोककला का संरक्षण एवं संवर्धन करना है। इस आयोजन में मुख्यमंत्री यादव ने 'बिन्नू की बारात' नामक पूरी तरह बुंदेली बोली में बनी फीचर फिल्म के टीज़र और मोशन पोस्टर का विमोचन किया। उन्होंने बुंदेलखंडी कलाकारों को सम्मानित किया और क्षेत्रीय समाजसेवियों को बुंदेली सम्मान से नवाज़ा। इस मौके पर बुंदेली कलाकारों ने आकर्षक लोक नृत्यों की प्रस्तुतियाँ दीं, जिसने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बुंदेली बोली के प्रेमी और सुधिजन शामिल हुए। मुख्यमंत्री यादव ने कार्यक्रम में सामग्री निर्माताओं (कंटेंट क्रिएटर्स) के साथ भी संवाद किया और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि बुंदेलखंड अपने शौर्य के लिए जगज़ाहिर है और सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। समागम में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता मुकेश तिवारी, अभिनेत्री चाहत पांडे, रोहित पंडित, कार्यक्रम के संयोजक सचिन चौधरी, विपुल तिवारी सहित बुंदेलखंड क्षेत्र के करीब 300 से अधिक जेन जी कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को बुंदेलखंडी वाद्ययंत्र 'तमूरा' भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने मुख्यमंत्री के विचारों का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे उन्हें साथ लेकर ही देश और प्रदेश के विकास के लक्ष्यों को पूरा करेंगे। यह समागम बुंदेली भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्षेत्र के विकास में युवाओं की भूमिका को रेखांकित करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। बुंदेली बोली की अपनी एक अलग पहचान और आकर्षण है। इसमें वह माधुर्य और अपनत्व की मिठास है, जो श्रोताओं को सीधे प्रभावित करती है।

