पूर्वी चम्पारण जिले में पंचायत सचिवों के सामूहिक तबादले और राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल के कारण आम लोगों के जरूरी कामकाज ठप पड़ गए हैं। पंचायतों से जुड़े प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आवास योजना, पेंशन और अन्य विकास योजनाओं के आवेदन समय पर निष्पादित नहीं हो पा रहे हैं। लोक सेवाओं के अधिकार (आरटीपीएस) के तहत निर्धारित समयसीमा में आवेदनों का निपटारा न होने की स्थिति गंभीर हो गई है। मोतिहारी आरटीपीएस डेली डैशबोर्ड के अनुसार, 13 अक्टूबर 2026 को जारी आंकड़ों में जिले के विभिन्न अनुमंडलों में समयसीमा समाप्त होने के बाद भी सैकड़ों आवेदन लंबित पाए गए। जिले के विभिन्न प्रखंडों में राशनकार्ड से संबंधित 41 आवेदन लंबित हैं, जबकि जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के लंबित आवेदनों का स्पष्ट आंकड़ा भले ही उपलब्ध न हो, लेकिन 5 से 13 अक्टूबर के बीच ऐसे करीब 150 आवेदन लंबित होने की जानकारी सामने आई है। विभिन्न सेवाओं के मामलों में सबसे अधिक 29 एक्सपायर्ड आवेदन चिरैया प्रखंड में और 17 आवेदन पहाड़पुर प्रखंड में दर्ज किए गए हैं। राज्य सरकार ने पंचायत सचिवों के तबादले के बाद 5 अक्टूबर से उन्हें स्वतः विरमित कर दिया था। पंचायत सचिवों ने अपनी मांग गृह जिले में पदस्थापना को लेकर हड़ताल की थी, जिसके बाद हुए तबादलों के कारण कई प्रखंडों में पंचायत सचिवों की भारी कमी उत्पन्न हो गई है। जिले में 54 पंचायत सचिवों ने योगदान दिया है, लेकिन उन्हें अब तक प्रखंड आवंटित नहीं किए गए हैं। इस स्थिति के कारण कोटवा और आदापुर जैसे प्रखंडों में पंचायत सचिवों के पद खाली होने से पंचायत स्तर का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बंजरिया प्रखंड की 12 पंचायतों का कामकाज महज दो पंचायत सचिवों के भरोसे चल रहा है, जिससे कर्मचारियों पर अत्यधिक बोझ पड़ रहा है। पंचायत सचिव गणेश चौधरी, जिन्हें सिसवा पूर्वी और चैलाहा पंचायतों का कार्यभार सौंपा गया है, ने बताया कि अपने आवंटित पंचायतों के लोगों और कार्यों की जानकारी होने के कारण रिपोर्ट तैयार करना आसान हो जाता है। हालांकि, दूसरे पंचायतों का प्रभार मिलने पर वहां की स्थिति की पूरी जानकारी न होने से रिपोर्ट तैयार करने में परेशानी होती है। इसी तरह, पीपराकोठी प्रखंड की छह पंचायतों का कामकाज सिर्फ एक पंचायत सचिव आलोक बैठा के जिम्मे है, जो कार्यभार को संभालने में कठिनाई का अनुभव कर रहे हैं। छौड़ादानो प्रखंड की 15 पंचायतों का संचालन महज तीन पंचायत सचिवों के भरोसे है, जिससे प्रत्येक सचिव पर औसतन पांच से अधिक पंचायतों का भार आ रहा है। पताही प्रखंड की 15 पंचायतों की जिम्मेदारी केवल दो पंचायत सचिवों पर है। बीडीओ उदय कुमार के अनुसार, तबादले के बाद मिले दोनों सचिवों में से एक को छह और दूसरे को नौ पंचायतों का प्रभार सौंपा गया है, जो उनकी क्षमता से कहीं अधिक है। यह स्थिति आम जनता के लिए सेवाओं की उपलब्धता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है। रामगढ़वा प्रखंड की 16 पंचायतों का कामकाज दो पंचायत सचिवों के भरोसे है, जिससे प्रत्येक सचिव लगभग सात पंचायतों का कार्यभार संभाल रहा है। हरसिद्धि प्रखंड की 19 पंचायतों के लिए केवल तीन पंचायत सचिव उपलब्ध हैं। बीडीओ अजय प्रकाश राय ने बताया कि एक सचिव को सात, दूसरे को सात और तीसरे को पांच पंचायतों की जिम्मेदारी दी गई है, जो अत्यधिक कार्यभार का सूचक है। कल्याणपुर प्रखंड की 24 पंचायतों का कामकाज छह पंचायत सचिवों के जिम्मे है, लेकिन पंचायतों की अधिक संख्या के कारण सचिवों पर अतिरिक्त कार्यभार का दबाव बना हुआ है। यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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पूर्वी चम्पारण में तबादलों के बाद सचिवों की किल्लत, सरकारी कामकाज प्रभावित
14 अक्टूबर 2026 को 11:19 pm बजे

पूर्वी चम्पारण में तबादलों के बाद सचिवों की किल्लत, सरकारी कामकाज प्रभावित
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