मध्य प्रदेश के स्कूलों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान, तनाव दूर करने के नवाचार शुरू
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित स्कूलों में अब बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों के पढ़ाई के दबाव, परीक्षा की चिंता और व्यक्तिगत उलझनों को कम करने के लिए कई नए कदम उठाए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र तनावग्रस्त होने के बजाय आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और स्कूल उनके लिए सीखने के साथ-साथ मानसिक सुकून का केंद्र भी बनें। इन नवाचारों के माध्यम से, विभाग का लक्ष्य एक ऐसा सुरक्षित और प्रेरणादायक वातावरण तैयार करना है जहाँ बच्चे अपनी समस्याओं को खुलकर साझा कर सकें और आवश्यकता पड़ने पर उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें। विद्यार्थी अपनी परेशानियों, चिंताओं या उलझनों को बिना अपना नाम बताए ‘उमंग प्रश्नपेटी’ में लिखकर डाल सकते हैं। स्कूल हेल्थ एंड वेलनेस एंबेसडर इन समस्याओं पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। यह पहल बच्चों को बिना किसी झिझक के अपनी बात रखने और उचित समाधान पाने का अवसर देती है। इसके अतिरिक्त, विद्यालयों में ‘काइंडनेस वॉल’ और ‘ग्रैटिट्यूड जार’ जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में दयालुता, सहयोग और कृतज्ञता की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन माध्यमों से विद्यार्थी एक-दूसरे के लिए प्रोत्साहन और आभार व्यक्त करने वाले संदेश लिखते हैं, जिससे स्कूल में सकारात्मक माहौल बनता है और बच्चों के बीच आपसी जुड़ाव बढ़ता है। बच्चों को मोबाइल फोन और पढ़ाई के निरंतर दबाव से राहत देने के लिए 'नो स्क्रीन' और 'नो होमवर्क-डे' जैसी गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही, खेल, कला और संगीत जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रार्थना सभाओं में योग, प्राणायाम और गहरी सांस लेने जैसे अभ्यासों को शामिल किया गया है। ये सभी गतिविधियां विद्यार्थियों को पढ़ाई से एक आवश्यक विराम प्रदान करती हैं और उनके मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होती हैं। विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों द्वारा परामर्श सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इन सत्रों का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों से निपटने में मदद करना है। इसके अलावा, ‘ओपन माइक’ सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों और शिक्षकों को अपने अनुभव साझा करने के अवसर दिए जा रहे हैं।

