आशा हॉस्पिटल के कर्मचारियों द्वारा पत्रकार पर हमले के बाद अस्पताल की जांच शुरू, बेसमेंट में बिना अनुमति चल रही थी लैब
नीमच में आशा हॉस्पिटल के कर्मचारियों ने पत्रकार गौरव त्रिपाठी से मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। यह घटना अस्पताल में चल रही अनियमितताओं को लेकर खबर प्रकाशित होने से नाराज कर्मचारियों द्वारा की गई। इस मामले में पुलिस ने गौरव त्रिपाठी की शिकायत पर पांच नामजद आरोपियों समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। गुरुवार को अस्पताल के दो कर्मचारी, नवीन बैरागी और कमलेश यादव, पत्रकार के कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अस्पताल से जुड़ी खबरों को लेकर 'सेटलमेंट' करने का दबाव बनाया। जब ब्यूरो चीफ गौरव त्रिपाठी ने इनकार कर दिया, तो नवीन बैरागी ने गाली-गलौज शुरू कर दी और मारपीट की कोशिश करते हुए पत्रकार का कॉलर पकड़ लिया। कार्यालय में मौजूद अन्य साथियों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। विरोध होने पर दोनों कर्मचारी नीचे चले गए, लेकिन बाद में उन्होंने फोन कर 10-15 अन्य लोगों को बुला लिया। आरोपियों ने धमकी दी कि यदि अस्पताल के खिलाफ कुछ भी प्रकाशित किया तो जान से खत्म कर देंगे। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आरोपी भाग चुके थे। इस मामले में कैंट पुलिस ने नवीन बैरागी, कमलेश यादव, डॉक्टर देव, चंद्रभान और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जांच कार्यवाहक प्रधान आरक्षक शिवपाल सिंह को सौंपी गई है। कैंट थाना प्रभारी सौरभ शर्मा ने बताया कि सिंधी कॉलोनी स्थित कार्यालय में हुई घटना के संबंध में पत्रकार गौरव त्रिपाठी को धमकी देने की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस की कार्रवाई जारी है। यह घटना अस्पताल में चल रही गंभीर अनियमितताओं के बीच हुई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) नीमच ने 5 नवंबर को आशा हॉस्पिटल की संचालक डॉ. तृप्ति तिवारी को एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में कहा गया है कि अस्पताल को मध्य प्रदेश उपचर्यागृह तथा रुजोपचार संबंधी स्थापना अधिनियम के तहत मिली अनुमति के विपरीत, बेसमेंट में बिना अनुमति के पैथोलॉजी लैब, ओपीडी, आईपीडी वार्ड और फार्मेसी संचालित की जा रही थी। नोटिस में अस्पताल प्रबंधन से 10 दिन के भीतर फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने को कहा गया है। जवाब न मिलने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। यह पहली बार नहीं है जब अस्पताल को नोटिस जारी किया गया हो। इससे पहले भी अगस्त में आशा हॉस्पिटल के निर्माण और संचालन में अनियमितताओं को लेकर खबरें प्रकाशित की गई थीं। नगर पालिका के रिकॉर्ड के अनुसार, भवन निर्माण अनुमति के विपरीत बेसमेंट और अवैध निर्माण को लेकर वर्ष 2023 और 2024 में भी नोटिस जारी किए गए थे। 20 मई 2024 को अंतिम सूचना पत्र भी जारी हुआ था, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। कलेक्टर से शिकायत के बाद अब अस्पताल की जांच शुरू हो गई है। कर्मचारियों द्वारा पत्रकार से मारपीट और धमकी देने की घटना ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

