प्रधान न्यायाधीश ने स्टॉल का किया अवलोकन
प्रधान जिला न्यायाधीश के निर्देश पर नवरात्रि पर्व के अवसर पर बड़ी मंदिर परिसर में विधिक सहायता स्टॉल स्थापित किया गया है। इस स्टॉल का उद्देश्य आमजन को उनके विधिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना और जरूरतमंद व्यक्तियों को विधिक सहायता की जानकारी प्रदान करना है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को विधिक सेवा योजनाओं के बारे में सूचित किया जाएगा। इस पहल के तहत, प्रिंसिपल जिला न्यायाधीश और अध्यक्ष सुभाष सोलंकी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दमोह ने स्वयं स्टॉल का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने आमजन तक विधिक सेवाओं और योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के प्रयासों का निरीक्षण किया। सुभाष सोलंकी ने इस बात पर जोर दिया कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसके विधिक अधिकारों और विधिक सेवा योजनाओं की जानकारी पहुंचाना विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रतिबद्धता है। प्राधिकरण समय-समय पर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से विधिक जागरूकता बढ़ाने का निरंतर प्रयास करता रहता है, ताकि पात्र व्यक्ति इन योजनाओं का लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि यह स्टॉल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटी) उदय सिंह मरावी, विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) विश्वनाथ शर्मा, जिला न्यायाधीश धर्मेश भट्ट, पंकज शर्मा, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी स्नेहा सिंह, न्यायिक मजिस्ट्रेट नीलेश मुलतकर, दीर्घा ऐरन, उत्कर्ष दिवाकर, पलक सिघई दिवाकर, अधिवक्ता कमलेश भारद्वाज, गरत सेन, मृत्युंजय हजारी सहित मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी और न्यायिक कर्मचारीगण उपस्थित रहे। इन सभी ने विधिक सहायता स्टॉल की स्थापना और उसके उद्देश्यों पर चर्चा की। व्यवहार न्यायाधीश और वरिष्ठ खण्ड सचिव उषाकांता कृषाण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दमोह ने बताया कि नवरात्रि के दौरान बड़ी श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए प्रधान जिला न्यायाधीश के निर्देश पर यह स्टॉल लगाया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्टॉल पर प्रतिदिन 01 पीएलव्ही (पैरा लीगल वॉलंटियर्स) की ड्यूटी लगाई गई है।

