अभी तक 3 लाख से अधिक किसानों ने कराया पंजीयन
खरीफ विपणन वर्ष 2026 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार और बाजरा की खरीद के लिए पंजीयन प्रक्रिया जारी है। अभी तक 3 लाख 5 हजार 82 किसानों ने अपना पंजीयन कराया है, जो कि पंजीयन की कुल क्षमता का एक बड़ा हिस्सा है। इस वर्ष पंजीयन की व्यवस्था को पहले से अधिक सहज और सुगम बनाया गया है, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। किसानों के लिए आधार नंबर का सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है, जो फसल बेचने के लिए भी आवश्यक होगा। यह सत्यापन आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी के माध्यम से या बायोमेट्रिक डिवाइस का उपयोग करके किया जा सकेगा। आधार नंबर से बैंक खाते का सत्यापन भी पंजीयन के दौरान ही किया जाएगा। इसके लिए मध्य प्रदेश राज्य आपूर्ति निगम ई- उपार्जन/जेआईटी पोर्टल के माध्यम से एक रुपये का ट्रांजेक्शन भी कराएगा। यह सुनिश्चित करेगा कि भुगतान सीधे किसान के खाते में जाए और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। यह पंजीयन प्रक्रिया एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केंद्र और निजी साइबर कैफे पर भी उपलब्ध है। हालांकि, पंजीयन के लिए प्रति किसान 50 रुपये से अधिक शुल्क नहीं लिया जाएगा। दूसरी ओर, सिकमी, बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों के लिए पंजीयन की सुविधा केवल सहकारी समितियों और सहकारी विपणन सहकारी संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों पर ही मिलेगी। यह व्यवस्था इन विशेष श्रेणियों के किसानों को ध्यान में रखकर की गई है। किसानों को पंजीयन कराते समय भूमि संबंधी दस्तावेज़, आधार कार्ड और अन्य फोटो पहचान पत्र प्रस्तुत करने होंगे। इन सभी दस्तावेज़ों का समुचित परीक्षण कर उनका रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य है। किसान का पंजीयन तभी मान्य होगा जब उसके भू-अभिलेख में दर्ज नाम और आधार कार्ड में दर्ज नाम का मिलान हो। यदि भू-अभिलेख और आधार कार्ड में नाम में कोई विसंगति पाई जाती है, तो पंजीयन का सत्यापन तहसील कार्यालय से कराना होगा। इस सत्यापन के बाद ही पंजीयन को अंतिम रूप दिया जाएगा। प्रदेश में किसानों को सुविधा देने के लिए 1100 से अधिक पंजीयन केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों को क्रियाशील रखने के निर्देश सभी जिला कलेक्टर्स को दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि किसान आसानी से अपने मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक जानकारी को अपडेट करा सकें। इसके अलावा, पोस्ट ऑफिस में संचालित आधार सुविधा केंद्र का भी उपयोग पंजीयन के लिए किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करता है कि किसानों को अपने दस्तावेज़ों को अद्यतन करने और पंजीयन कराने में कोई परेशानी न हो। जबलपुर संभाग में 1 लाख 47 हजार 824 किसानों ने पंजीयन कराया है। वहीं, नर्मदापुरम् संभाग में 16 हजार 398, भोपाल में 8 हजार 599, रीवा में 94 हजार 384, शहडोल में 21 हजार 456 और सागर संभाग में 16 हजार 155 किसानों ने अपना पंजीयन पूर्ण कर लिया है। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि प्रदेश भर में किसान समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने के लिए उत्सुक हैं और पंजीयन प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। सभी जिला कलेक्टर्स को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे जिला और तहसील स्तर पर स्थापित आधार पंजीयन केंद्रों को सक्रिय रखें। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को उनके मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक जानकारी को आसानी से अपडेट कराने की सुविधा प्रदान करना है। यह कदम किसानों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में मदद करेगा। इस प्रक्रिया में राजस्व विभाग द्वारा शत-प्रतिशत किसानों का सत्यापन भी किया जाएगा। पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों पर की गई है।
