प्रदेशाध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने कहा कि रात 10:30 बजे बिजली काटी जा रही है, जिससे ग्रामीण परेशान हैं
मध्य प्रदेश में बिजली कटौती, खाद-बीज की कमी, सूखे जैसे हालात और फसलों की खरीदी को लेकर भारतीय किसान संघ ने सरकार को दशहरे तक का अल्टीमेटम दिया है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने मंगलवार को भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं का जल्द निराकरण करे, नहीं तो संघ बड़ा आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि संघ बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान चाहता है, लेकिन मुख्यमंत्री से चर्चा के लिए लगातार संपर्क करने के बावजूद अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। आंजना ने कहा कि दीपावली नजदीक है, लेकिन किसान बिजली, पानी, खाद और बीज के लिए परेशान हैं। गांवों में अघोषित बिजली कटौती हो रही है। रात 10:30 बजे बिजली काट दी जाती है, जबकि यह लोगों के सोने का समय होता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों और परिवारों को परेशानी हो रही है। बिजली कटौती का मुद्दा कैबिनेट में मंत्री भी उठा चुके हैं, लेकिन हालात नहीं सुधरे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से वार्ता के लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। संभव है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मुख्यमंत्री या प्रशासन किसानों को चर्चा के लिए बुलाए। संघ बातचीत से समाधान चाहता है। सरकार को दशहरे तक का समय दिया जा रहा है। इसके बाद आंदोलन किया जाएगा। आंजना ने दावा किया कि आंदोलन में आम जनता भी किसानों का साथ देगी। किसान की आवाज ही भारतीय किसान संघ की आवाज है। किसान जो मांग करेगा, संघ उसी का समर्थन करेगा। किसानों की मांग है कि जिन फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित है, उनकी खरीदी उसी दर पर हो। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार समर्थन मूल्य घोषित कर चुकी है, तो भावांतर योजना की जरूरत क्यों पड़ रही है। उनके मुताबिक, भावांतर की व्यवस्था केवल उन फसलों के लिए होनी चाहिए, जिनका समर्थन मूल्य घोषित नहीं है। उन्होंने सोयाबीन और धान की खरीदी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार भावांतर देने की बात कर रही है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसानों को इसका लाभ कैसे मिलेगा। धान के मामले में भावांतर की व्यवस्था कैसे लागू होगी, यह भी चिंता का विषय है। आंजना ने कहा कि भावांतर का भुगतान मंडियों के माध्यम से किया जाता है, लेकिन कई जिलों और तहसीलों में मंडियां ठीक से संचालित नहीं हो रही हैं। कुछ जगह मंडियां बनी हैं, लेकिन वहां नीलामी नहीं होती। शहरों में ही नीलामी होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी होती है। सरकार खरीदी व्यवस्था को सुचारू करे, ताकि किसानों को उपज का उचित दाम मिल सके। किसान संघ के प्रदेशाध्यक्ष ने दावा किया कि प्रदेश के 20 से 22 जिलों में सूखे जैसी स्थिति है। कई क्षेत्रों में नदी-नाले खाली हैं। आने वाले दिनों में पीने के पानी का संकट भी खड़ा हो सकता है। जिन क्षेत्रों में सूखे के हालात हैं, वहां कुछ किसानों के पास फसल के लिए केवल 10 से 15 दिन का पानी बचा है। आंजना ने सवाल उठाया कि सिंचाई के लिए बिजली और पानी नहीं मिलेगा, तो किसान फसल कैसे उगाएगा। उन्होंने कहा कि खेती के लिए समय पर पानी मिलना जरूरी है। जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है, वहां सरकार कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा दे और किसानों को उपयुक्त बीज उपलब्ध कराए। उन्होंने नर्मदा का पानी नहरों और नदियों के माध्यम से खेतों तक पहुंचाने की मांग भी की। आंजना ने कहा कि गांवों में सिंचाई के साथ घरेलू बिजली आपूर्ति भी नियमित नहीं है। मेंटेनेंस के नाम पर रात में दो से चार घंटे तक बिजली गायब रहती है। रात 10:30 बजे, जब लोग सोने की तैयारी करते हैं, उसी समय बिजली काट दी जाती है। इससे गांवों में बुजुर्गों और परिवारों को परेशानी होती है। मंत्रियों द्वारा कैबिनेट बैठक में बिजली कटौती का मुद्दा उठाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब यह समस्या सरकार के स्तर पर भी सामने आ चुकी है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुधरनी चाहिए। बिजली नहीं मिलने से किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। सूखे जैसे हालात वाले क्षेत्रों में परेशानी और बढ़ गई है। संघ ने घरेलू और कृषि, दोनों तरह की बिजली आपूर्ति नियमित करने की मांग की। आंजना ने खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि टोकन के नाम पर प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही है, लेकिन किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। उनके मुताबिक, अधिकारी और कर्मचारी व्यवस्था बनाने में लगे हैं, फिर भी किसानों को खाद के लिए परेशान होना पड़ रहा है। किसान फोन और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से अपनी समस्या बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेती के महत्वपूर्ण समय में खाद की कमी से फसल प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इसे सरकार का अच्छा कदम बताया।

