भोपाल के मास्टर प्लान में एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है। बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में जमीन और निर्माण को लेकर दो बिल्कुल अलग तस्वीर दिख रही हैं। एक तरफ आम लोगों के मकानों पर निर्माण की रोक लगी है और उनकी जमीन की कीमतें लगभग स्थिर हैं, तो दूसरी ओर रसूखदारों के बंगलों और फार्म हाउस वाले इलाकों में निर्माण की अनुमति 5 गुना तक बढ़ा दी गई है। यह दोहरा मापदंड शहर के जिम्मेदार अफसरों की मिलीभगत की ओर इशारा करता है, जिन्होंने नियमों को अपनी सहूलियत के हिसाब से मोड़ लिया है। कैचमेंट क्षेत्र में जिन इलाकों को एग्रीकल्चर उपयोग का बताया गया है, वहां करीब 40 हजार मकान हैं, जिनमें लगभग 3 लाख लोग निवास करते हैं। मास्टर प्लान के मौजूदा नियमों के अनुसार, ये सभी मकान अवैध माने जाते हैं। इन पर किसी भी तरह के निर्माण पर रोक है। वहीं, दूसरी ओर एलड़ीआर (लो डेन्सिटी रेजिडेंशियल) क्षेत्र में, जहां प्रभावशाली लोगों के बंगले और फार्म हाउस स्थित हैं, वहां निर्माण की अनुमति 5 गुना तक बढ़ा दी गई है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से नियमों के उल्लंघन और पक्षपात को दर्शाती है। शहर की 24 लाख की आबादी में यह कैचमेंट क्षेत्र की बसाहट करीब 12.5% हिस्सा है। कैचमेंट का वह हिस्सा जो निगम सीमा के वार्ड 26 में आता है, वहां 22 अवैध कॉलोनियां चिह्नित की गई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन कॉलोनियों में नगर निगम द्वारा बिल्डिंग परमिशन भी दी जा रही है। यह सीधे तौर पर मास्टर प्लान के प्रावधानों का उल्लंघन है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टाउन प्लानिंग के नजरिए से कैचमेंट इलाके में लगभग 40 हजार मकान अवैध हैं। इन अवैध कॉलोनियों में बिजली और पानी के कनेक्शन भी उपलब्ध हैं। इतना ही नहीं, नगर निगम इन कॉलोनियों से प्रॉपर्टी टैक्स भी वसूल रहा है। यह सब तब हो रहा है जब मास्टर प्लान के अनुसार ये मकान अवैध हैं। यह दोहरा मापदंड इस बात का संकेत देता है कि नियमों का पालन केवल आम जनता के लिए है, जबकि रसूखदारों के लिए नियमों को आसानी से तोड़ा या मोड़ा जा सकता है। पिछले एक साल में इन प्रभावित इलाकों की कलेक्टर गाइडलाइन में तीन गुना तक की बढ़ोतरी की गई है। उदाहरण के तौर पर, सेवनिया गौंड स्थित सेंट्रल पार्क कॉलोनी, जो रसूखदारों की प्रॉपर्टी के लिए जानी जाती है, वहां कृषि भूमि की गाइडलाइन एक साल में ₹12 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर से बढ़कर ₹15 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर हो गई। इसी तरह, व्हिस्परिंग पाम्स में कृषि भूमि की कीमत ₹30 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर रही। यह वृद्धि आम लोगों के लिए अकल्पनीय है। सबसे बड़ा उछाल ग्राम मेंडोरी के केरवा वुड्स इलाके में देखा गया। यहां कृषि भूमि की गाइडलाइन 2025-26 में ₹1 करोड़ प्रति हेक्टेयर थी, जो अब बढ़कर 2026-27 में ₹3 करोड़ प्रति हेक्टेयर हो गई है। एक साल में 200% की यह वृद्धि बताती है कि इन इलाकों में जमीन की कीमतें किस कदर बढ़ाई गई हैं। वहीं, मेंडोरा, मेंडोरी, सेवनिया गौंड और केरवा वुड्स जैसे इलाके इस नई गाइडलाइन से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। दूसरी ओर, शहरी सीमा यानी वार्ड 26 में शामिल नीलबड़ जैसे इलाकों में स्थिति बिल्कुल विपरीत है। यहां आवासीय प्लॉट की गाइडलाइन पिछले दो वर्षों से ₹16,000 रुपए प्रति वर्गमीटर पर स्थिर रही है। कृषि भूमि की दर भी ₹3 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर पर स्थिर रही है। ग्रामीण हिस्से की नीलबड़ एवं अन्य इलाके जस के तस रहे, जबकि आवासीय प्लॉट में मामूली बढ़ोतरी हुई। यह तुलना साफ दर्शाती है कि सरकारी नियमों का लाभ किसे मिल रहा है। एक विशेषज्ञ, प्रो. केके धोटे, जो मैनिट, भोपाल में आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग विभाग के एचओडी हैं, उन्होंने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि कैचमेंट इलाके में लगभग 40 हजार मकान टाउन प्लानिंग के नजरिए से अवैध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन इलाकों में रसूखदारों ने पहले से ही तय सीमा से कहीं ज्यादा निर्माण कर लिया है। यह एक गंभीर आरोप है जो नियमों के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। एकड़ में देखें तो सरकारी मूल्य करीब ₹40.47 लाख से बढ़कर ₹1.21 करोड़ हो गया।
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मास्टर प्लान में दोहरा मापदंड: कैचमेंट में आमजन पर रोक, रसूखदारों को छूट
वरिष्ठ स्थानीय ब्यूरो प्रमुख7 अक्टूबर 2026 को 11:25 pm बजे

मास्टर प्लान में दोहरा मापदंड: कैचमेंट में आमजन पर रोक, रसूखदारों को छूट
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