सबलगढ़ की विशेष अदालत ने विद्युत चोरी के एक मामले में आरोपी रतीराम धाकड़ को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। न्यायालय उठने तक की सजा के साथ ही आरोपी पर 23,937 रुपये का अर्थदंड और 15,958 रुपये का सिविल दायित्व भी अधिरोपित किया गया है। यह फैसला मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा दर्ज कराए गए मामले में आया है, जिसमें रतीराम धाकड़ पर विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 के तहत आरोप तय किए गए थे। इस बिजली का उपयोग वह अपने 25 केवीएएचपी के मोनो ब्लॉक पंप से सिंचाई के लिए कर रहा था। कंपनी के जांच दल ने निरीक्षण के दौरान इस विद्युत चोरी का पर्दाफाश किया था और आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया था। विशेष जिला न्यायाधीश अजय कुमार चौहान की अदालत ने आरोपी को न केवल न्यायालय उठने तक की सजा सुनाई, बल्कि विद्युत चोरी से प्राप्त वित्तीय लाभ के तीन गुना के बराबर 23,937 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यह अर्थदंड विद्युत चोरी के गंभीर अपराध के प्रति एक सख्त संदेश है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आरोपी निर्धारित समय सीमा के भीतर अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है, तो उसे 05 माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने आरोपी पर 15,958 रुपये का सिविल दायित्व भी अधिरोपित किया है, जो विद्युत कंपनी को हुए नुकसान की भरपाई के लिए है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी विद्युत चोरी और बिजली के अवैध उपयोग के विरुद्ध निरंतर प्रभावी कार्रवाई कर रही है। कंपनी का कहना है कि विद्युत चोरी एक दंडनीय अपराध है और ऐसे मामलों में कानून के अनुसार दंडात्मक और सिविल कार्रवाई की जाती है। इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य बिजली आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना और उपभोक्ताओं को सुरक्षित व वैध बिजली उपलब्ध कराना है। कंपनी ने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे विद्युत का वैध और सुरक्षित उपयोग करें तथा बिजली चोरी जैसे अपराधों से दूर रहें। कंपनी ने यह भी आश्वासन दिया है कि सिविल दायित्व की राशि जमा होने और नियमानुसार अपील अवधि समाप्त होने के बाद, उक्त राशि परिवादी विद्युत कंपनी को वापस कर दी जाएगी। यह फैसला विद्युत चोरी के खिलाफ जारी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दर्शाता है कि अवैध बिजली के उपयोग के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
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विद्युत चोरी में दोषी रतीराम धाकड़ को अदालत ने सुनाई सजा
7 अक्टूबर 2026 को 11:25 pm बजे
