पारंपरिक मोटे अनाजों और देशी बीजों के संरक्षण से कृषि जैव विविधता को बढ़ावा दे रहीं गंगा बाई गौड़
मानव जीवन विकास समिति कटनी का मार्गदर्शन मिल रहा है
जिले के जबेरा विकासखंड के ग्राम कलूमर की महिला किसान गंगा बाई गौड़ पारंपरिक मोटे अनाजों और देशी बीजों के संरक्षण के माध्यम से कृषि विरासत को सहेजने का महत्वपूर्ण प्रयास कर रही हैं। उनकी यह पहल न केवल पारंपरिक खेती को बढ़ावा दे रही है, बल्कि देशज कृषि ज्ञान, स्थानीय खाद्य परंपराओं और कृषि जैव विविधता को संरक्षित करने की दिशा में भी प्रेरणादायक है। इस नवाचार में मानव जीवन विकास समिति, कटनी द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। बदलते समय में आधुनिक खेती के तौर-तरीकों और कुछ चुनिंदा फसलों का प्रचलन बढ़ रहा है, जिससे कई पारंपरिक अनाज और उनके देशी बीज खेती से दूर होते जा रहे हैं। यह केवल फसलों का कम होना नहीं, बल्कि पीढ़ियों से संचित कृषि ज्ञान और स्थानीय खाद्य परंपराओं के कमजोर पड़ने की चुनौती भी है। इस चुनौती के बीच गंगा बाई गौड़ ने पारंपरिक मोटे अनाजों के महत्व को समझते हुए उनके संरक्षण को अपनी पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। गंगा बाई कोदो, कुटकी, रागी, बाजरा और कंगनी जैसे पारंपरिक अनाजों के साथ-साथ रामतिल जैसी फसलों की विविधता को सहेजने के प्रयास से जुड़ी हैं। इन फसलों के संरक्षण के माध्यम से वह स्थानीय कृषि परंपराओं को आगे बढ़ाने की दिशा में योगदान दे रही हैं। किसी भी किसान के लिए बीज उसकी खेती की बुनियाद होता है, और देशी बीज केवल अगली फसल तैयार करने का साधन नहीं बल्कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकसित हुए पारंपरिक ज्ञान और अनुभवों की धरोहर हैं।
जब किसान अपने खेतों में पारंपरिक फसलों को स्थान देते हैं, तो वे केवल अनाज नहीं उगाते बल्कि अपनी संस्कृति, खाद्य परंपरा और कृषि विरासत को भी जीवित रखते हैं। उनकी कहानी इस बात का स्मरण कराती है कि कृषि की असली समृद्धि केवल खेतों में पैदा होने वाले अनाज की मात्रा में नहीं, बल्कि खेतों में सुरक्षित रखी गई विविधता और पीढ़ियों से चले आ रहे ज्ञान में भी निहित है।
जागरूक महिला किसान गंगा बाई गौड़ के इस नवाचार में सहयोगी संस्था मानव जीवन विकास समिति कटनी द्वारा मार्गदर्शन दिया जा रहा है। यह संस्था प्रेरक संदेश देती है कि देशी बीज बचेंगे, पारंपरिक अनाज उगेंगे और कृषि की विविधता बनी रहेगी, तभी हमारी समृद्ध कृषि विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुँच सकेगी।

