शारदीय नवरात्रि 2026 का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। आज, मंगलवार, 13 अक्टूबर को, उज्जैन के तीर्थ पुरोहित पंडित रूपम जोशी मां दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा-विधि, महत्व और जरूरी परंपराओं के बारे में जानकारी दे रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा साहस, शांति और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। उनकी आराधना से भक्त सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। नवरात्रि में शक्ति आराधना का विशेष महत्व है और विधि-विधान से की गई पूजा विशेष फलदायी होती है। पंडित रूपम जोशी बताते हैं कि मां चंद्रघंटा की पूजा कैसे करनी चाहिए और किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नवरात्रि के तीसरे दिन की आराधना का महत्व भी अनूठा है। मां चंद्रघंटा को उनकी शांत और सौम्य मुद्रा के लिए जाना जाता है, जो भक्तों को भय से मुक्ति दिलाती हैं और उन्हें आध्यात्मिक बल प्रदान करती हैं। उनकी कृपा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है। भक्त उन्हें श्वेत पुष्प, फल, मिष्ठान और विशेष रूप से दूध से बनी चीजों का भोग लगाते हैं। पूजा के दौरान मंत्रोच्चार का विशेष महत्व है। 'ॐ देवी चंद्रघंटाय नमः' मंत्र का जाप करने से मां प्रसन्न होती हैं। पंडित जोशी के अनुसार, मां को प्रसन्न करने के लिए शुद्ध मन और सच्ची श्रद्धा से आराधना करना सबसे महत्वपूर्ण है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की सवारी सिंह है, जो उनकी शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है। उनके दस हाथ हैं, जिनमें से प्रत्येक में वे शस्त्र धारण करती हैं। यह उनके भक्तों की रक्षा करने की तत्परता को दर्शाता है। नवरात्रि के तीसरे दिन भक्त उपवास रखते हैं और शाम को विधि-विधान से मां की आरती उतारते हैं। इस दिन घर में शांति और पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है। पंडित रूपम जोशी ने यह भी बताया कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक को अलौकिक शक्ति प्राप्त होती है। उनके घंटे की ध्वनि से सभी असुर और बाधाएं दूर हो जाती हैं। यह पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो अपने जीवन में साहस और दृढ़ संकल्प की कमी महसूस करते हैं। मां की कृपा से वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। आज उज्जैन में मां चंद्रघंटा के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है। श्रद्धालु सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं।
समाचार
नवरात्रि का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की पूजा विधि और महत्व उज्जैन के पंडित ने बताई
13 अक्टूबर 2026 को 11:47 pm बजे
