मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की न्यायाधीश सिंह की एकलपीठ ने छतरपुर जिले के हरपालपुर स्थित ट्राइबल एक्सीलेंस छात्रावास में पदस्थ कर्मचारी इंद्रपाल अहिरवार के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान एकलपीठ ने प्रथमदृष्टया राहत प्रदान की। याचिकाकर्ता इंद्रपाल अहिरवार की ओर से अधिवक्ताओं प्रवीण वर्मा व ज्योति वर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता का 31 मार्च 2026 को हरपालपुर स्थित ट्राइबल एक्सीलेंस छात्रावास में स्थानांतरण हुआ था। अक्टूबर में जिला कलेक्टर ने छात्रावास का निरीक्षण किया था, जिसमें व्यवस्थाएं सही और निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई थीं। इसके बावजूद, 16 अक्टूबर 2026 को इंद्रपाल अहिरवार को निलंबित कर दिया गया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि निलंबन की कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई। यह सवाल उठता है कि जब निरीक्षण के दौरान छात्रावास की व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गई थीं, तब निलंबन की कार्रवाई का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए था। याचिकाकर्ता की ओर से निलंबन आदेश में कारणों का उल्लेख नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया। मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि कलेक्टर के निरीक्षण में छात्रावास की व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गई थीं, इसके बावजूद बिना कारण बताए निलंबन की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई न्यायोचित नहीं थी। इंद्रपाल अहिरवार को बिना किसी ठोस आधार के सेवा से हटा दिया गया था, जो कि अनुचित था। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अंतरिम राहत के तौर पर कलेक्टर द्वारा इंद्रपाल अहिरवार के किए गए निलंबन के आदेश पर रोक लगा दी। यह रोक तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी। इस आदेश से इंद्रपाल अहिरवार को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले काफी समय से निलंबन झेल रहे थे। यह मामला छतरपुर जिले के हरपालपुर स्थित ट्राइबल एक्सीलेंस छात्रावास से जुड़ा है, जहां पदस्थ कर्मचारी इंद्रपाल अहिरवार के निलंबन को चुनौती दी गई थी।
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हाईकोर्ट ने बिना कारण बताए किए गए निलंबन आदेश पर लगाई रोक
30 अक्टूबर 2026 को 11:24 pm बजे
