जिला दमोह में जनजातीय हितग्राहियों के लिए मत्स्य पालन योजनाओं के तहत स्वरोजगार के अवसर खोले गए हैं। धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान वर्ष 2026–27 के अंतर्गत, अनुसूचित जनजाति वर्ग के पात्र व्यक्तियों से मत्स्य पालन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक व्यक्ति 25 अक्टूबर 2026 तक कार्यालय सहायक संचालक, मत्स्योद्योग, जिला दमोह में अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालन से जुड़े किसानों और मत्स्यिकी गतिविधियों में रुचि रखने वालों को सामाजिक, भौतिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हुए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के तहत चयनित ग्रामों में निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार विभिन्न गतिविधियों के लिए अनुदान प्रदान किया जाएगा, जिससे इन समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाया जा सके। योजना में मत्स्य पालन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण गतिविधियाँ शामिल हैं, जिनके लिए वित्तीय सहयोग दिया जाएगा। इनमें नवीन तालाबों का निर्माण, मत्स्य बीज उत्पादन हेतु नर्सरी हैचरी की स्थापना, पुराने मत्स्य तालाबों का जीर्णोद्धार, और मिश्रित मत्स्य पालन जैसी गतिविधियाँ प्रमुख हैं। इसके अतिरिक्त, पंगेशियस एवं तिलापिया मछली पालन के लिए आवश्यक इनपुट की व्यवस्था, जलाशयों में मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन, और रंगीन मछली की ब्रीडिंग व रियरिंग इकाइयों की स्थापना भी योजना का हिस्सा हैं। आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए आरएएस (रीसर्क्युलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम) और बायोफ्लॉक इकाइयों की स्थापना के लिए भी सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़े और पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव कम हो। मत्स्य पालन से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास पर भी जोर दिया गया है। जलाशयों में केज कल्चर और पेन कल्चर जैसी तकनीकों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। साथ ही, मत्स्य उत्पादों के भंडारण और परिवहन के लिए कोल्ड स्टोरेज और आइस प्लांट के निर्माण या आधुनिकीकरण की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
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दमोह में जनजातीय हितग्राहियों के लिए मत्स्य पालन योजनाएं शुरू
14 अक्टूबर 2026 को 11:19 pm बजे

दमोह में जनजातीय हितग्राहियों के लिए मत्स्य पालन योजनाएं शुरू
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