स्थानीय उत्पादों को दें प्राथमिकता
दीपावली केवल रोशनी, खुशियों और उत्सव का पर्व नहीं है, बल्कि यह लाखों छोटे कारोबारियों, दस्तकारों, कुम्हारों, शिल्पकारों और मेहनतकश परिवारों के लिए साल की सबसे बड़ी उम्मीद भी लेकर आता है। त्योहार के दौरान बाजारों में होने वाली खरीदारी से इन परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेशवासियों से दीपावली पर 'लोकल को वोकल' बनाने की अपील कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि त्योहारों की खरीदारी में स्थानीय उत्पादों और स्थानीय कारोबारियों को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इस अपील के पीछे एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक संदेश छिपा है। उनका मानना है कि दीपावली की खुशियां तभी सार्थक होंगी, जब इसका उजाला समाज के कमजोर और मेहनतकश वर्गों के 2024 घरों तक भी पहुंचे। हम जब बाजार से मिट्टी के दीये, पूजा सामग्री, सजावट के सामान, रंगोली, तोरण, बंदनवार और हस्तनिर्मित वस्तुएं खरीदते हैं, तब वास्तव में किसी गरीब परिवार की आजीविका को सहारा देते हैं। हमारी छोटी-सी खरीदारी किसी कारीगर के घर में खुशियां ला सकती है। दीपावली के बाजारों में मिट्टी के दीये बनाने वाले कुम्हारों की मेहनत सबसे अधिक दिखाई देती है। कई सप्ताह पहले से वे मिट्टी तैयार करने, चाक पर दीये बनाने, उन्हें सुखाने और रंगने में जुट जाते हैं। इसी तरह महिलाएं घरों में बैठकर सजावटी सामान, शुभ-लाभ के प्रतीक, पूजा की थालियां, कपड़े की झालरें और अन्य हस्तनिर्मित वस्तुएं तैयार करती हैं। इसका सीधा संबंध स्थानीय अर्थव्यवस्था से है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से दीपावली पर 'लोकल को वोकल' बनाने की अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' मंत्र को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि त्योहारों की खरीदारी में स्थानीय उत्पादों और कारोबारियों को प्राथमिकता दी जाए। इसी दिशा में यह एक सकारात्मक पहल है, जिसका उद्देश्य समाज के कमजोर और मेहनतकश वर्गों तक दीपावली की खुशियां पहुंचाना है।
