उज्जैन में 11 अक्टूबर से शुरू हुई शारदीय नवरात्रि का आज तीसरा दिन है। पहले दिन से ही शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर सहित शहर के सभी प्रमुख देवी मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। शहर के बड़े गरबा पांडालों में भी महिलाएं और युवतियां डांडिया खेलकर देवी की भक्ति में लीन हैं। हरसिद्धि मंदिर प्रांगण में स्थित 2 हजार साल पुरानी दीपमालाएं प्रतिदिन शाम को रोशन हो रही हैं, जो भक्तों के लिए एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती हैं। इन दीपमालाओं को एक बार प्रज्वलित करने के लिए 60 लीटर तेल और 4 किलो रूई का उपयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया लगभग 5 मिनट में 6 लोगों द्वारा पूरी कर ली जाती है। नवरात्रि के दौरान हरसिद्धि मंदिर में शाम 7 बजे आरती का आयोजन होता है। आरती से पहले, 6 लोग दीप स्तंभों की सफाई और उन्हें प्रज्वलित करने की तैयारियों में जुट जाते हैं। कुल 1011 दीपों को 5 मिनट के भीतर प्रज्वलित कर दिया जाता है, और यह मनमोहक दृश्य देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में एकत्र हो रहे हैं। दोनों दीपमालाओं में कुल 1011 दीपक हैं। हरसिद्धि मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी 2000 साल पुरानी दीपमालाएं हैं, जिनकी ऊंचाई 51 फीट है। इन विशाल दीपमालाओं को प्रज्वलित करने के लिए श्रद्धालु कई महीने पहले से बुकिंग करवाते हैं। एक बार दीपमाला प्रज्वलित करने पर लगभग 15,000 रुपये का खर्च आता है। प्रत्येक दीपमाला को जलाने में 4 किलो रूई और 60 लीटर तेल का उपयोग होता है। हरसिद्धि मंदिर के पुजारियों के अनुसार, नवरात्रि के इन नौ दिनों में मंदिर में देवी की शुद्ध सात्विक शाक्त पूजा की जाती है। माता को विशेष रूप से अनार के दाने, शहद और पूर्णाहुति पर अदरक का भोग लगाया जाता है। चूंकि माता हरसिद्धि नौ दिनों तक शयन नहीं करतीं, इसलिए इन दिनों शयन आरती नहीं की जाती है। शहर में विभिन्न स्थानों पर गरबों का आयोजन लगातार जारी है, जहां महिलाएं और युवतियां डांडिया खेलकर देवी की आराधना कर रही हैं। किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या छेड़छाड़ को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन सतर्क है। एसपी ने 500 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की है, जिनमें 50 महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं। ये पुलिसकर्मी रात में गरबा स्थलों पर जाकर सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर रहे हैं। हरसिद्धि मंदिर देश के 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब माता सती ने दक्ष प्रजापति के यज्ञ में आत्मदाह किया था, तब शिव जी उनके पार्थिव शरीर को लेकर चले थे। जहां-जहां माता सती के अंग गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई।
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उज्जैन: हरसिद्धि मंदिर की प्राचीन दीपमालाएं नवरात्रि में रोशन, भक्तों का तांता
13 अक्टूबर 2026 को 11:47 pm बजे

उज्जैन: हरसिद्धि मंदिर की प्राचीन दीपमालाएं नवरात्रि में रोशन, भक्तों का तांता
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