चौरई गांव की महिलाओं ने खेती में रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक अनूठी पहल की है। काजल स्व-सहायता समूह की सदस्य घर पर ही जैविक कीटनाशक और फसल वर्धक तैयार कर रही हैं। ये महिलाएं न केवल अपने गांव में बल्कि आसपास के किसानों को भी जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं, जिससे टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिल रहा है। महिलाओं का यह प्रयास ग्रामीण विकास में उनकी भागीदारी और सामूहिक शक्ति का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है। घर पर जैविक कीटनाशक और फसल वर्धक तैयार करने की यह पहल गांवों में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है। महिलाओं ने यह समझा कि स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके भी फसलों की देखभाल के लिए उपयोगी जैविक उत्पाद बनाए जा सकते हैं। इन जैविक उत्पादों का मुख्य उद्देश्य फसलों को स्वस्थ रखना, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखना और खेती में रासायनिक साधनों पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। यह पहल केवल उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से गांव के किसानों में जैविक खेती के महत्व के बारे में जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है। महिलाएं किसानों को स्थानीय संसाधनों से टिकाऊ कृषि पद्धतियाँ अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। मानव जीवन विकास समिति कटनी इस पहल को आगे बढ़ाने में तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है। संस्था के सचिव निर्भय सिंह के मार्गदर्शन में जैविक खेती के प्रचार-प्रसार और किसानों को जागरूक करने का कार्य किया जा रहा है।
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जैविक कीटनाशक बनाकर महिलाएँ कर रहीं प्रेरित
31 अक्टूबर 2026 को 10:52 pm बजे
जैविक कीटनाशक बनाकर महिलाएँ कर रहीं प्रेरित
