सरकार नारकोटिक्स पुलिसिंग का ढांचा बढ़ाएगी, 10 नारकोटिक्स थाने बनाने की तैयारी है
मुख्यमंत्री मोहन यादव की केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद मध्य प्रदेश में ड्रग तस्करी के बढ़ते अंतरराज्यीय नेटवर्क से निपटने के लिए सरकार ने नारकोटिक्स पुलिसिंग का ढांचा बढ़ाने की व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश को 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत एक तीन साल की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस कार्ययोजना का फोकस केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी और आरोपितों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तस्करी से जुड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क, ड्रग निर्माण की गुप्त लैब और उसके वित्तीय स्रोतों तक पहुंचने पर भी जोर रहेगा। सरकार का मानना है कि सप्लाई चेन तोड़ऩे के साथ युवाओं और विद्यार्थियों तक नशीले पदार्थों की पहुंच रोकना भी जरूरी है। इसके लिए कॉलेज-कैंपस भी निगरानी के दायरे में होंगे, जहां ड्रग-मुक्त बनाने के लिए अलग फ्रेमवर्क लागू किया जाएगा। पुलिस के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों में फैले नेटवर्क की वजह से केवल मध्य प्रदेश में कार्रवाई करने से पूरे तंत्र पर प्रभाव डालना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। ड्रग की सप्लाई के रूट पर नजर रखने के लिए जांच में सामने आए मामलों के आधार पर पुलिस ने अलग-अलग राज्यों से आने वाली नशीली सामग्री के रूट को चिह्नित किया है। उत्तर प्रदेश से कफ सिरप के रीवा-सतना रूट से आने, महाराष्ट्र से एमडी निर्माण में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की आपूर्ति, राजस्थान से एमडी की आवाजाही और छत्तीसगढ़ के रास्ते गांजा आने जैसी जानकारियां गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ में सामने आई हैं। इसी वजह से अब कार्रवाई को राज्य की सीमा से बाहर तक ले जाने और संबंधित राज्यों के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाने की तैयारी है। इस नई रणनीति के तहत सबसे बड़ा बदलाव नारकोटिक्स थानों की संख्या बढ़ाने का होगा। प्रदेश में फिलहाल केवल एक नारकोटिक्स थाना है, जिसे बढ़ाकर 10 करने की तैयारी है। इन थानों को बढ़ाने के साथ ही दूसरे राज्यों से समन्वय मजबूत किया जाएगा, ताकि अंतरराज्यीय नेटवर्क का पता लगाकर उसे ध्वस्त किया जा सके। इसके अलावा तस्करी से जुड़े लोगों की संपत्ति और पैसों के लेनदेन की जांच पर भी जोर रहेगा, ताकि नेटवर्क के आर्थिक आधार को कमजोर किया जा सके। अक्टूबर 2024 में भोपाल में 907 किलो एमडी की बरामदगी हुई थी।

